UP Election Analysis: क्‍या उद्धव ठाकरे के ‘बाजीराव’ बनेंगे राकेश टिकैत, संजय राउत ने मराठा पगड़ी पहनाकर दिया कौन सा ऑफर?,

मराठा साम्राज्‍य में राजा तो छत्रपति ही होता था, लेकिन राज्‍य की सुरक्षा और उसके विस्‍तार का काम उनके पेशवा ही किया करते थे। श्रीमंत पेशवा के रूप में मराठा योद्धा बाजीराव बल्‍लाल की बहादुरी के किस्‍से आज तक लोगों की जुबां पर हैं। उन्‍होंने मराठा साम्राज्‍य को इतना फैलाया था कि एक समय आधे हिंदुस्‍तान पर मराठाओं का अधिकार हो गया था। मराठाओं के सिरमौर छत्रपति शिवाजी के नाम पर राजनीति करने वाली शिवसेना भी विस्‍तार करना चाहती है। लंबे समय से शिवसेना मुंबई और महाराष्‍ट्र के बाहर सत्‍ता जमाना चाहती है। शिवसेना विस्‍तार के लिए आंदोलनकारियों में अपना बाजीराव तलाश कर रही है। एक समय गुजरात में पाटीदार आंदोलन खड़ा करने वाले हार्दिक पटेल पर शिवसेना सुप्रीमो उद्धव ठाकरे ने खूब डोरे डाले थे, लेकिन दाल नहीं गली और अब शिवसेना की नजर किसान आंदोलन के ‘नायक’ और भारतीय किसान यूनियन (BKU) नेता राकेश टिकैत पर है। इसी कड़ी में शिवसेना नेता संजय राउत गुरुवार को राकेश से टिकैत से मिले और उन्‍हें मराठा पगड़ी पहनाई। राकेश टिकैत ने भी बड़े सम्‍मान से मराठा पगड़ी पहनी और संजय राउत से बातचीत भी की, लेकिन क्‍या वह उद्धव ठाकरे के ‘बाजीराव’ बनेंगे? सवाल यही है, क्‍या है ऐसा संभव है, शिवसेना ऐसा चाहती है, इसमें कोई शक नहीं, लेकिन क्‍या राकेश टिकैत ऐसा करने को तैयार हैं, क्‍या हैं सारे समीकरण, आइए इसी पर चर्चा करते हैं:

महाराष्‍ट्र में बीजेपी के हाथों जमीन गंवा चुकी शिवसेना चाहती है यूपी में विस्‍तार

महाराष्‍ट्र में कभी बीजेपी के साथ गठबंधन की सियासत करने वाली शिवसेना, बीजेपी के ही हाथों महाराष्‍ट्र में अपनी जमीन गंवा चुकी है। आज भी महाराष्‍ट्र में भले ही शिवसेना, एनसीपी और कांग्रेस के समर्थन सरकार चला रही है और उद्धव ठाकरे राज्‍य के सीएम हैं। 2014 के बाद से हर चुनाव में बीजेपी ने शिवसेना की हिंदुत्‍व पॉलिटिक्‍स को ओवरटेक कर रखा है। घर में घिरी शिवसेना ने खुद बीजेपी से अलग करने के बाद विस्‍तार के लिए काफी प्रयास किए लेकिन उसे अब तक कोई खास सफलता नहीं हाथ लगी है। 2014 विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने राज्‍य की 288 सीटों में से 122 पर परचम लहराया था। उस चुनाव में शिवसेना 63 सीटें ही जीत पाई। बीजेपी को 2014 में 27.8 प्रतिशत वोट मिले थे, जबकि शिवसेना 19.3 प्रतिशत, कांग्रेस को 18 प्रतिशत, एनसीपी को 17 प्रतिशत वोट मिले थे। इसी तरह 2019 विधानसभा चुनाव बीजेपी 105 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी, जबकि शिवसेना 56 सीटों पर ही सिमट गई। शिवसेना ने 2019 में बीजेपी से गठबंधन को तोड़कर अपनी जमीन वापस पाने का प्रयास किया, अब वह सरकार में है और बीजेपी सबसे ज्‍यादा सीटकर भी विपक्ष में है। एक तरह से शिवसेना ने यह बताया कि महाराष्‍ट्र में कम सीटें जीतने के बाद बड़े भाई की भूमिका में शिवसेना ही रहेगा, लेकिन उसका बदला महाराष्‍ट्र तक सीमित नहीं है, अब शिवसेना यूपी में भी विस्‍तार करना चाहती है।

सपा से बात जरूर चल रही है, लेकिन मुश्किल है शिवसेना की राह

उत्‍तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2022 में शिवसेना 50 से 100 सीटों पर चुनाव लड़ना चाहती है, लेकिन समस्‍या यह है कि उनके पास कोई नेता नहीं है। शिवसेना इसी वजह से राकेश टिकैत को मराठा पगड़ी पहनाकर उन्‍हें यूपी में, खासतौर से पश्चिमी यूपी में पार्टी का लीडर बनाकर किसान आंदोलन से पैदा हुए आक्रोश को भुनाना चाहती है। दूसरी तरफ शिवसेना, समाजवादी पार्टी के साथ भी सीट शेयरिंग को लेकर चर्चा में हैं, लेकिन इसका परिणाम क्‍या होगा, ये सबको पता है। चूंकि, शिवसेना का यूपी में कोई जनाधार नहीं है, ऐसे में उसे समाजवादी पार्टी 50 से 100 सीटें क्‍यों देगी? हां, अगर शिवसेना को राकेश टिकैत का साथ मिलता है तो यूपी में उसका रास्‍ता खुल सकता है। इसमें टिकैत का भी फायदा है।

राकेश टिकैत सपा की तारीफ तो कर रहे हैं पर अखिलेश ने उन्‍हें नहीं दिया भाव

शिवसेना और राकेश टिकैत अगर साथ आते हैं तो ये दोनों के लिए फायदे का सौदा हो सकता है। किसान आंदोलन के जरिए मोदी सरकार को बैकफुट पर भेजकर तीनों कृषि बिलों का वापसी के बाद से राकेश टिकैत का सितारा बुलंद है। इसमें शक नहीं है कि राकेश टिकैत इस समय पूरी सरगर्मी से राजनीतिक विकल्‍प तलाश रहे हैं। हाल ही में एक चैनल पर उन्‍होंने खुलकर सपा की तारीफ भी की और कहा- ‘समाजवादी बोलने में कम और काम करने में ज्‍यादा विश्‍वास करते हैं’। गुरुवार को मीडिया में यह खबर भी आई कि राकेश टिकैत ने अपने सबसे करीबी नेता को अखिलेश यादव से मिलने भेजा है। मतलब झुकाव तो सपा की तरफ उनका है, लेकिन सपा ने उनके लिए वैसी गर्मजोशी नहीं दिखाई, जैसी शिवसेना नेता संजय राउत ने दिखाई। राउत फूल लेकर, कंधे पर हाथ रखा, गले भी मिले। मुलाकात के दौरान पीछे ढोल भी बज रहे थे।

शिवसेना के साथ जुड़ने में है टिकैत का फायदा

शिवसेना के साथ जुड़ने में टिकैत का फायदा है यह होगा कि वह अकेले ही यूपी में पार्टी के सबसे बड़े नेता होंगे। लेकिन अगर वह कांग्रेस, सपा, बसपा या कोई विकल्‍प तलाश करेंगे तो वहां उनके सामने कद्दावर नेताओं की लंबी लाइन होगी। मतलब वैसा रुतबा नहीं रहेगा। अब एक सवाल यह भी है कि शिवसेना का यूपी में आधार ही क्‍या है? लेकिन पॉलिटिकल सपोर्ट, पार्टी चलाने के लिए फंड, अपनी पसंद के नेताओं को टिकट, ये सब सुविधाएं राकेश टिकैत को शिवसेना में मिल सकती हैं।

राकेश टिकैत के साथ मुलाकात से पहले और मुलाकात के बाद जो ट्वीट किए उनसे स्‍पष्‍ट है कि शिवसेना चाहती क्‍या है। संजय राउत ने ट्वीट किया, ‘हमें किसानों का आशीर्वाद चाहिए, हम किसी के साथ गठबंधन नहीं करेंगे, लेकिन हम चाहते हैं कि UP में परिवर्तन हो और परिवर्तन हो रहा है। मैं पश्चिम UP जा रहा हूं, वहां किसान नेता राकेश टिकैत से मिलूंगा और जानकारी लूंगा कि वो क्या चाहते हैं, अगर हमें UP में लड़ना हैं तो हमें किसानों का आशीर्वाद चाहिए।’ टिकैत के साथ मुलाकात के बाद राउत ने कहा- ‘आज मुजफ्फरनगर में किसान नेता श्री राकेश टिकैत से मुलाकात कर उत्तर प्रदेश के किसानों की गंभीर समस्याओं और मुद्दों और देश की राजनीति पर प्रदीर्घ चर्चा हुई। खासकर, वेस्टर्न यूपी के ज्वलंत मुद्दों पर मंथन हुआ। शिवसेना किसानों को उनका न्याय दिलाने के लिए समर्पित है।’

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मनोज शर्मा

मनोज शर्मा (जन्म 1968) स्वर्णिम भारत के संस्थापक-प्रकाशक , प्रधान संपादक और मेन्टम सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं।

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