बैंक का एक चपरासी जिसने अंडरवर्ल्ड डॉन बनकर दहला दी थी मुंबई, जानिए कौन था वह शख्स,

साल 1993 के मुंबई सीरियल बम धमाकों को कौन भूल सकता है! इन बम धमाकों के कुछ ऐसे आरोपी भी हैं, जो आज तक पुलिस की पकड़ से बाहर हैं। उन्हीं में एक नाम टाइगर मेमन का भी है। सीबीआई की चार्जशीट में टाइगर भी आरोपी रहा, तो वहीं टाइगर के भाई व बम धमाकों में दोषी याकूब मेमन को 2015 में फांसी दे दी गई थी।

बैंक में चपरासी था टाइगर: मुंबई के अली रोड इलाके में 1960 में जन्में टाइगर मेमन का असली नाम इब्राहिम मुश्ताक अब्दुल रज्जाक नादिम मेमन था। उसके परिवार में मां-बाप के अलावा पांच छोटे भाई थे। परिवार की माली हालत ख़राब थी और पिता अब्दुल रज्जाक वेल्डिंग का काम करते थे। घर का बोझ कम करने के चलते कक्षा 10 तक पढ़े इब्राहिम मुश्ताक ने एक बैंक में चपरासी का काम शुरू किया। लेकिन यहां काम को लेकर उसका बैंक के मैनेजर से झगड़ा हो गया और नौकरी छूट गई।

इस तस्कर का बना ड्राइवर: चपरासी की नौकरी छूटी तो कुछ दिन इब्राहिम मुश्ताक काम की तलाश में इधर-उधर भटका। कुछ दिन बाद ही उसे ड्राइवर की नौकरी मिल गई। इब्राहिम मुश्ताक अब मशहूर तस्कर मोहम्मद मुश्तफा दौसा की गाड़ी चलाने लगा। इसी बीच दौसा ने उसकी मुलाकात दुबई के सोने के तस्कर याकूब भट्टी से कराई और वह गोल्ड की स्मगलिंग में याकूब का काम देखने लगा। साल भर के भीतर ही इब्राहिम ने पाक तस्कर तौफीक के साथ दोस्ती की और तस्करी के धंधे का बड़ा नाम बन गया। मजबूत प्लान और कई बार पुलिस से बचकर काम करने की तेजी के कारण उसे ‘टाइगर’ नाम दिया गया।

मुंबई के दंगे ने मन में भरी खटास: टाइगर मेमन ने तस्करी के धंधे में कमाए पैसों से माहिम की सम्राट कॉलोनी में कुछ इलेक्ट्रिक की दुकानों को शुरू किया था। लेकिन साल 1992 में मुंबई में हुए दंगे के दौरान उसकी दुकानों में आग लगा दी गई। बस यही वह घटना थी, जिसने टाइगर को मुंबई में बम धमाके करने के लिए प्रेरित किया। इसी घटना के कुछ महीनों बाद 12 मार्च 1993 में सिलसिलेवार ढंग से बम धमाकों को अंजाम दिया गया था। इन बम धमाकों का मास्टर माइंड टाइगर मेमन ही था।

दाउद ने की थी फंडिंग: 1993 के मुंबई बम धमाकों की साजिश में दाउद इब्राहिम ने विस्फोटक सामग्री व हथियारों की फंडिंग की थी, जिसे देश के बाहर से लाया गया था। यह सबसे भयानक और पहला बम धमाका था, जिसमें आरडीएक्स का इस्तेमाल किया गया था। टाइगर मेमन ने इस पूरे हमले की योजना को अपने भाई याकूब की मदद से अंजाम दिया था। हालांकि, इस घटना में कई अन्य लोग भी शामिल थे।

गाड़ियों में किया गया था विस्फोटक को लोड: इस मामले में पुलिस ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि, धमाके में उपयोग की गई गाड़ियों को टाइगर ने अपने ही संरक्षण में विस्फोटकों से लादा था और फिर हर जगह प्लांट करवाया था। धमाकों में इस्तेमाल की गई गाड़ियों में एक गाड़ी उसकी भाभी के नाम पर रजिस्टर्ड थी, जिसके बाद ही मेमन परिवार तक धमाके के तार जुड़े थे।

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मनोज शर्मा

मनोज शर्मा (जन्म 1968) स्वर्णिम भारत के संस्थापक-प्रकाशक , प्रधान संपादक और मेन्टम सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं।

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