चिकित्सा के परिसर,

देश के हर हिस्से में बेहतर चिकित्सा सुविधाएं पहुंचाई जा सकें और स्थानीय स्तर पर चिकित्सा संबंधी शोध और अनुसंधान को बढ़ावा मिले, इसलिए विभिन्न शहरों में अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स की शाखाएं खोलने की योजना बनी थी। उस योजना के तहत कई एम्स खुले भी। उनसे स्थानीय लोगों को लाभ भी मिल रहा है। इस तरह दिल्ली के एम्स पर बोझ कुछ कम हुआ है। मगर सेवाओं की उत्कृष्टता को लेकर जब-तब सवाल उठते रहते हैं कि विभिन्न शहरों में खुली एम्स की शाखाओं में दिल्ली के एम्स जैसी विशेषज्ञता नहीं हैं।

इस संबंध में एक संसदीय समिति का गठन किया गया, जिसने सुझाव दिया है कि एम्स में चिकित्सकों के तबादले की संभावना खोजी जानी चाहिए। इस सुझाव पर कुछ लोगों को आपत्ति हो सकती है, क्योंकि एम्स की व्यवस्था अभी उस तरह नहीं है, जैसे केंद्र के कई दूसरे विभागों की होती है। जो चिकित्सक और अनुसंधानकर्ता भर्ती किए जाते हैं, वे संबंधित शाखा के लिए ही किए जाते हैं। ऐसे में अगर पटना के किसी चिकित्सक का तबादला दिल्ली में किया जाता है, तो उसके लिए तो प्रसन्नता की बात हो सकती है, पर दिल्ली के चिकित्सक को अपने तबादले पर एतराज हो सकता है।

दरअसल, हर चिकित्सक चाहता है कि उसकी नियुक्ति किसी बड़े शहर में हो, जहां उसे सुविधाजनक जीवन जीने को मिले। वहां उसके बच्चों की पढ़ाई-लिखाई के लिए अच्छे स्कूल हों, उसके परिवार को महानगरों की सुविधाएं मिल सकें। इसलिए ज्यादातर चिकित्सक छोटे और अपेक्षाकृत पिछड़े माने जाने वाले शहरों में जाकर अपनी सेवाएं देने को तैयार नहीं देखे जाते। इसका नतीजा यह होता है कि छोटे शहरों और उनके आसपास के गांवों के लोगों को काबिल चिकित्सकों की सेवाएं नहीं मिल पातीं और वे इलाज के लिए दिल्ली, बंगलुरु, मुंबई जैसे शहरों की तरफ रुख करते हैं। बहुत सारे लोग दिल्ली के एम्स में इलाज के लिए महीनों इंतजार करते हैं।

ऐसे में कई लोगों की गंभीर बीमारियां और बढ़ती जाती हैं। कहना न होगा कि इस तरह कई लोग समय पर इलाज न मिल पाने की वजह से जान से भी हाथ धो बैठते होंगे। लोगों को उनके घर के आसपास बेहतर चिकित्सा सुविधाएं मिल सकें, काबिल चिकित्सक उनका इलाज कर सकें, इसलिए सरकार ने नियम बनाया था कि चिकित्सा स्नातक की पढ़ाई कर चुके हर युवा को पहले कम से कम एक साल ग्रामीण इलाकों में जाकर अपनी सेवाएं देनी होंगी। उसी आधार पर उन्हें लाइसेंस आदि प्रदान करने का भी नियम बनाया गया। मगर उसका भी अपेक्षित लाभ नजर नहीं आता।

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मनोज शर्मा

मनोज शर्मा (जन्म 1968) स्वर्णिम भारत के संस्थापक-प्रकाशक , प्रधान संपादक और मेन्टम सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं।

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