Antilia Bomb Case- पांच लाख रुपये लेकर परमबीर सिंह के दफ्तर में बदली गई थी साइबर रिपोर्ट, जानें NIA पर क्यों बिफरा बांबे HC

मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के बाहर बम प्लांट करने के मामले में बांबे हाईकोर्ट एनआईए की रिपोर्ट से इत्तेफाक नहीं रखता। एनआईए का मानना है कि मुंबई के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह का इस मामले से

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मुकेश अंबानी के घर एंटीलिया के बाहर बम प्लांट करने के मामले में बांबे हाईकोर्ट एनआईए की रिपोर्ट से इत्तेफाक नहीं रखता। एनआईए का मानना है कि मुंबई के तत्कालीन पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह का इस मामले से कोई ज्यादा लेना देना नहीं है। लेकिन एनआईए की रिपोर्ट बांबे हाईकोर्ट के गले के नीचे नहीं उतर रही। अदालत को लगता है कि केंद्रीय एजेंसी ने मामले की जांच बेहद बचकाने तरीके से की।

जस्टिस रेवती मोहिते जस्टिस आरएन लड्डा की बेंच ने एनआईए को फटकार लगाते हुए एंटीलिया मामले में आरोपी बनाए गए एनकाउंटर स्पेशटलिस्ट प्रदीप शर्मा को बेल पर रिहा करने से मना कर दिया। कोर्ट का कहना था कि एंटीलिया के साथ मनसुख हिरेन की हत्या के मामले में एनआईए ने तह में जाकर जांच नहीं की। एजेंसी ने कई ऐसे पहलुओं को नजरंदाज किया जो केस को अंजाम तक पहुंचा सकते थे।

परमबीर के दफ्तर में बदली गई थी रिपोर्ट

बांबे हाईकोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा कि एंटीलिया मामले में एनआईए ने उन लोगों को पूरी तरह से अनदेखा किया जो मुख्य साजिशकर्ताओं के साथ मिले हुए थे। हाईकोर्ट इस बात से बेहद नाराज दिखा कि स्कार्पियो में जिलेटिन की रॉड रखने के मामले में एजेंसी ने प्रदीप शर्मा की भूमिका को अनदेखा किया। जब हमने बार बार पूछा तब एजेंसी को सचिन वाजे और प्रदीप शर्मा के बीच का कनेक्शन दिखा। कोर्ट का कहना था कि एजेंसी के पास इस बात का कोई जवाब नहीं है कि साइबर एक्सपर्ट इशान सिन्हा को परमबीर सिंह ने पांच लाख रुपये क्यों दिए। इस रिपोर्ट को लेकर परमबीर सिंह क्यों रुचि ले रहे थे। जबकि सिन्हा ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि उसने परमबीर सिंह के दफ्तर में बैठकर नया मसौदा तैयार किया था।

पहली रिपोर्ट में नहीं था Jaish-ul-Hind का जिक्र

अदालत ने कहा कि इशान सिन्हा ने अपने बयान में कहा है कि पहले उसने जो रिपोर्ट तैयार की थी उसमें टेलीग्राम चैनल Jaish-ul-Hind का कोई जिक्र नहीं था। पहली रिपोर्ट बहुत छोटी थी। लेकिन परमबीर सिंह के कहने पर उसने उनके दफ्तर में बैठकर नई रिपोर्ट तैयार की। इसके लिए पुलिस कमिश्नर ने उसे पांच लाख रुपये भी दिए। हालांकि उसने पैसे लेने से इन्कार कर दिया था। लेकिन परमबीर ने जब जोर दिया तो पैसे ले लिए।

एंटीलिया केस में परमबीर सिंह को सीधे तौर पर आरोपी नहीं बनाया गया है। अलबत्ता एजेंसी ने इस बात का जवाब तलाश करने की कोशिश नहीं की कि प्रदीप शर्मा मार्च 2021 में कमिश्नर के दफ्तर में क्या कर रहा था। एजेंसी के मुताबिक मनसुख हिरेन की हत्या की साजिश वहीं पर रची गई। एनआईए की चार्जशीट के मुताबिक सचिन वाजे ने जिलेटिन की रॉड कार में प्लांट करने की साजिश कुछ लोगों के साथ मिलकर रची थी। प्रदीप शर्मा ने मनसुख हिरेन की हत्या की पटकथा तैयार की। लेकिन एजेंसी ने उसे एंटीलिया मामले में अपनी चार्जशीट में शामिल नहीं किया है। कोर्ट का कहना था कि प्रदीप शर्मा और वाजे शुरू से ही एक दूसरे के साथ थे। वो साजिश में शामिल थे। अलबत्ता एनआईए को ये चीज दिखी ही नहीं।

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मनोज शर्मा

मनोज शर्मा (जन्म 1968) स्वर्णिम भारत के संस्थापक-प्रकाशक , प्रधान संपादक और मेन्टम सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं।

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