Chandigarh- उद्योग की जमीन रियल एस्टेट कंपनी को ट्रांसफर, पूर्व मंत्री अरोड़ा समेत दस पर केस

चंडीगढ़,राज्य ब्यूरो : पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने धोखाधड़ी से उद्योग की जमीन रियल एस्टेट कंपनी को ट्रांसफर करने के मामले में पूर्व कांग्रेस मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा व 10 सरकारी कर्मचारियों के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज किया है। इनमें से सात

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चंडीगढ़,राज्य ब्यूरो : पंजाब विजिलेंस ब्यूरो ने धोखाधड़ी से उद्योग की जमीन रियल एस्टेट कंपनी को ट्रांसफर करने के मामले में पूर्व कांग्रेस मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा व 10 सरकारी कर्मचारियों के विरुद्ध आपराधिक मामला दर्ज किया है। इनमें से सात को गिरफ्तार भी कर लिया गया है। आरोप है कि मिलीभगत से उद्योग के लिए आवंटित प्लाट को नियमों के विरुद्ध रियल एस्टेट कंपनी गुलमोहर सिटी को ट्रांसफर कर दिया गया। यह मामला फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी की जांच रिपोर्ट के बाद दर्ज किया गया है।

प्लाट ट्रांसफर के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल

जांच में पाया गया है कि कंपनी को प्लाट ट्रांसफर करने वाली फाइल पर नोटिंग के दो पेज फाइल में संलग्न बाकी पेजों से मेल नहीं खाते। प्लाट ट्रांसफर करने के लिए फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। आवेदन व प्रस्ताव की गहनता से जांच नहीं की गई। मामले में रियल एस्टेट फर्म गुलमोहर टाउनशिप प्राइवेट लिमिटेड के तीन मालिकों को भी नामजद किया गया है।

सुंदर शाम अरोड़ा के अलावा पंजाब स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कारपोरेशन (पीएसआइडीसी) की पूर्व एमडी नीलिमा, पूर्व कार्यकारी निदेशक एसपी सिंह, पूर्व एस्टेट अधिकारी अंकुर चौधरी, भाई सुखदीप सिंह सिद्धू, पूर्व जीएम कार्मिक दविंदरपाल सिंह, पूर्व डीटीपी तेजवीर सिंह (मृत्यु हो चुकी है), पूर्व मुख्य महाप्रबंधक (योजना) जेएस भाटिया, पूर्व एटीपी (योजना) आशिमा अग्रवाल, पूर्व कार्यकारी अभियंता परमिंदर सिंह, पूर्व डीए रजत और पूर्व एसडीई संदीप सिंह, गुरमोहर सिटी के मालिक जगदीप सिंह, गुरप्रीत सिंह व राकेश कुमार शर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की विभिन्न धाराओं व धोखाधड़ी की धारा में मामला दर्ज किया गया है। इनमें से रजत कुमार, संदीप सिंह, जेएस भाटिया, आशिमा अग्रवाल, परमिंदर सिंह, दविंदर पाल सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया है। सभी आरोपित अभी पीएसआइडीसी में विभिन्न पदों पर तैनात हैं।

सरकार को 1.23 करोड़ का नुकसान

1987 की डीड के अनुसार इस प्लाट का उपयोग केवल औद्योगिक उद्देश्यों के लिए किया जाना था और गुलमोहर टाउनशिप की ऐसी कोई पृष्ठभूमि नहीं है। पीएसआइडीसी के नियमों के अनुसार वर्ष 1987 से प्लाटो की फीस 20 रुपये प्रति गज व तीन रुपये प्रति वर्ष की दर से ली जानी थी। 1,21,000 वर्ग गज के लिए 51,25,000 फीस बनती थी। रियल एस्टेट कंपनी ने पहले ही आवेदन के साथ पे आर्डर अटैच कर रखा था, जबकि पीएसआइडीसी से किसी ने इसकी मांग नहीं की थी। इससे पंजाब सरकार को 1,23,42,000 रुपये का वित्तीय नुकसान हुआ। जांच के दौरान पाया गया कि यदि इस प्लाट को राज्य सरकार के निर्देश, नियमों के अनुसार बेचा जाता तो सरकार को 600 से 700 करोड़ की आय होती।

1987 में सेल डीड के माध्यम से अलाट की गई थी 25 एकड़ जमीन

राज्य सरकार ने 1987 में आनंद लैप्स लिमिटेड को 25 एकड़ जमीन सेल डीड के माध्यम से अलाट की थी। इसे बाद में सिग्नीफाई इनोवेशंस नाम की फर्म को ट्रांसफर कर दिया गया। 17 मार्च, 2021 को पंजाब स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कारपोरेशन ने एनओसी प्राप्त करने के बाद सिग्नीफाई इनोवेशंस की ओर से सेल डीड के माध्यम से इसे गुलमोहर टाउनशिप को बेच दिया। गुलमोहर टाउनशिप ने एक पत्र पूर्व मंत्री सुंदर शाम अरोड़ा को भेजा, जिसे अरोड़ा ने एमडी पीएसआइडीसी को आगे बढ़ा दिया, ताकि टाउनशिप में प्लाट का विभाजन किया जा सके। रियल एस्टेट फर्म के प्रस्ताव की जांच के लिए एक विभागीय जांच कमेटी का भी गठन किया गया। एमडी पीएसआइडीसी ने एक विभागीय समिति का गठन किया। इसमें सभी आरोपित शामिल थे।

कमेटी ने प्रस्ताव रिपोर्ट, प्रोजेक्ट रिपोर्ट व अन्य नियमों का नोटिस लिए बिना 12 प्लाटों में से 125 प्लाटों में भूखंडों को विभाजित करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। कमेटी ने पंजाब प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, नगर निगम, बिजली बोर्ड, वन विभाग, फायर ब्रिगेड आदि से परामर्श नहीं किया।

Edited By: Nidhi Vinodiya

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मनोज शर्मा

मनोज शर्मा (जन्म 1968) स्वर्णिम भारत के संस्थापक-प्रकाशक , प्रधान संपादक और मेन्टम सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं।

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