बधाई हो बधाई!

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श्रमिक दिवस

चिलचिलाती धूप हो,
कंपकंपाती ठंड हो,
अथक सतत परिश्रम,
जीने का आधार हो।।
मजदूर, हुए हैं मजबूर,
जीवन राग, ताल न सुर,
पसीने से तर जिंदगी,
महंगाई का भस्मासुर।।
कहीं न मिले छांव,
कहीं न मिले ठाँव,
दया धर्म न करुणा,
पीछे छूट गया गांव।।
रिसते अनगिन घाव,
छलनी अधनंगे पाव,
भूख से बिलखते बच्चें,
बीच भंवर जीवन नाव।।
शिक्षा न व्यापार,
पढ़ना, लिखना दुश्वार,
स्वप्न संजोये प्रगति के,
पत्थरों से लगे ठोकर।।
मेहनत, मजदूरी करूंगा,
बच्चों को खूब पढ़ाऊंगा,
बनूंगा जीवन शिल्पकार,
अफसर बड़ा बनाऊंगा।।
श्रम ही जीवन कर्म फल,
मजदूरी, चुभता हुआ शूल,
हम भी आप से इंसान,
समझने में न हो भूल।।
श्रमिक हैं हम भाई-भाई
पाते इज्जत की कमाई,
हमारा भी हो सम्मान,
ज्ञान-ध्यान से होगी भलाई।।
न चाह मावा, मलाई,
खूब करे सब पढ़ाई,
बधाई हो बधाई, गूंजे,
श्रमिक मन खुशी समाई।।

\\\"स्वर्णिम
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मनोज शर्मा

मनोज शर्मा (जन्म 1968) स्वर्णिम भारत के संस्थापक-प्रकाशक , प्रधान संपादक और मेन्टम सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं।

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