आयी बरखा बहार!

पाषाण हॄदय चीर मुस्कुराता आया नवांकुर,

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पाषाण हॄदय चीर मुस्कुराता आया नवांकुर,

गहन तमस से झांकती आयी उषा किरण।।
पात-पात डोलती ओस की नन्हीं-नन्हीं बुन्दे,
डाल-डाल खिलती कलियां खोल रही पांखें।।
कलरव मधुरिम करे पंछी, सृष्टि का गुणगान,
धानी चूनर ओढ़ इतराती धरा, गाये मंगल गान।।
प्रकृति का अनुपम नजारा, रिमझिम बरखा बहार,
रवि-रश्मियां नटखट, धूप सुहानी, जीवन का हुंकार।।
उल्लसित जलधार, खिलेगी नवजीवन फुलवारी,
हरियाली मखमल बिछेगी, सजेगी फूलों की रंगोली।।
तन-मन भक्तिभाव, हो सदाचार से जीवन श्रृंगार,
मानव जीवन भूषित हो, हो ऐसा आचार-विचार।।
सौभाग्य हमारा, पुण्योदय से मिला मानव जीवन,
व्यर्थ न गंवाओ, जिओ, जीने दो, निर्मल हो मन।।

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मनोज शर्मा

मनोज शर्मा (जन्म 1968) स्वर्णिम भारत के संस्थापक-प्रकाशक , प्रधान संपादक और मेन्टम सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं।

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