प्रकृति माता

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प्रकृति हमारी पूजनीया मां, गुरुणी माता,

कण-कण, बूंद-बूंद, सुख, आनंद दाता।।
तेजस रवि किरणें, शीतल मंद चांदनी,
ओस- बूंदों की सुरमई संगीत रागिनी।।
खिलती कलियां, सुरभित लहराती पवन,
भवरों की गुनगुन, तितलियां मनभावन।।
पल-पल समय की जाने हम महत्ता,
सृजन और निर्मिति, जीवन की सफलता।।
एक दूजे के लिए जिये, फले, फूले मानवता,
जीवन हो खुशियों का मेला, हो सरसता।।
प्रेमरस धार निर्मल, जीवन का संजीवन,
निरंतर बहती धार, निर्मल रहे धरा गगन।।
ईर्ष्या, द्वेष, अहंकार, तजो मिथ्या अभिमान।
रहो प्रेम से, प्राची से मुस्कुराती आये विहान।।
प्रकृति का ध्यान रखे, बने पर्यावरण मित्र।
जीवन हो सुंदर, शील, संस्कार सजा चरित्र।।

\\\"स्वर्णिम
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मनोज शर्मा

मनोज शर्मा (जन्म 1968) स्वर्णिम भारत के संस्थापक-प्रकाशक , प्रधान संपादक और मेन्टम सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं।

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