रोहिणी आचार्य की राजनीति में एंट्री से लालू परिवार और RJD पर क्या असर होगा?

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रोहिणी आचार्य बिहार की सारण सीट से लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं. लालू यादव की ये दूसरी बेटी हैं जो चुनाव मैदान में उतरने जा रही हैं. पिता लालू यादव, मां राबड़ी देवी और बहन मीसा भारती के साथ हरिहरनाथ मंदिर पहुंच कर पूजा पाठ के बाद रोहिणी आचार्य ने 2 अप्रैल से अपना जनसंपर्क अभियान शुरू करने का ऐलान किया था.

अपने परिवार के पक्ष में सोशल मीडिया पर वो पहले से ही एक्टिव रही हैं, पिछले साल में लालू यादव को किडनी डोनेट करने के बाद से वो ज्यादा ही तारीफ और सुर्खियां बटोरने लगी हैं. हाल ही में जब लालू यादव से प्रवर्तन निदेशालय के अधिकारी पूछताछ कर रहे थे, तब भी रोहिणी आचार्य सोशल मीडिया पर आगे बढ़ कर राजनीतिक विरोधियों के खिलाफ तीखे पोस्ट लिख रही थीं.

बिहार की राजनीति में रोहिणी आचार्य का अब भी खास परिचय यही है कि वो लालू यादव की बेटी हैं. लोकसभा चुनाव 2024 में लालू यादव की दो-दो बेटियां चुनाव मैदान में उतरने जा रही हैं. मीसा भारती फिलहाल राज्यसभा सांसद हैं, लेकिन अब तक एक बार भी लोकसभा चुनाव नहीं जीत पाई हैं.

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मंदिर दर्शन के बाद रोहिणी आचार्य ने कहा, सिंगापुर से ही हम सबके नाक में दम किए हुए थे... अब सारण की धरती पर आ गए हैं, तो सारण की पूरी जनता मेरा साथ देगी. रोहिणी आचार्य सिंगापुर में अपने पति और बच्चों के साथ रहती हैं.

रोहिणी आचार्य बिहार की सारण लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने जा रही हैं, जहां उनका मुकाबला बीजेपी के राजीव प्रताप रूडी से होगा.

सारण वही लोकसभा सीट है जहां से लालू यादव 1977 में पहली बार लोकसभा पहुंचे थे, और आखिरी बार भी वहीं से सांसद थे. डीलिमिटेशन से पहले सारण का नाम छपरा लोकसभा सीट हुआ करता था.

लालू यादव अब तक चार बार इस इलाके का संसद में प्रतिनिधित्व कर चुके हैं. 2013 में चारा घोटाले में सजा हो जाने के चलते लालू यादव की संसद सदस्यता रद्द हो गई थी - और उनके चुनाव लड़ने पर भी पाबंदी लग गई. अब भी वो जमानत पर ही जेल से बाहर हैं.

2014 में ये इलाका लालू परिवार के हाथ से छिटक कर बीजेपी के हिस्से में चला गया. खास बात ये रही कि 2014 में राबड़ी देवी को आरजेडी का उम्मीदवार बनाया गया था, लेकिन बीजेपी के राजीव प्रताप रूडी से वो चुनाव हार गईं. 2019 में आरजेडी ने लालू यादव के समधी चंद्रिका राय को उम्मीदवार बनाया था, लेकिन बीजेपी ने कब्जा बरकरार रखा.

जहां तक रोहिणी आचार्य की राजनीति में एंट्री के असर की बात है, पार्टी में तो असर तब देखने को मिलेगा जब वो चुनाव जीत जाएंगी, या फिर हारने के बाद भी मीसा भारती जैसी अहमियत जी जाती है.

तेजस्वी यादव की मुश्किलें बढ़ाएंगी रोहिणी यादव

रिश्तेदारों को छोड़ दें तो पहले से ही लालू यादव सहित परिवार के पांच लोग राजनीति में सक्रिय हैं. आरजेडी की कमान फिलहाल तेजस्वी यादव के हाथ में है. बिहार के दो बार डिप्टी सीएम रहे तेजस्वी यादव फिलहाल विधायक हैं. उनके बड़े भाई तेज प्रताप यादव भी विधायक हैं. पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी विधान परिषद सदस्य हैं, जबकि लालू यादव की बेटी मीसा भारती राज्यसभा सांसद हैं.

अब रोहिणी यादव के चुनाव लड़ने के बाद परिवारवाद की राजनीति का मुद्दा फिर से जोर पकड़ेगा. 2020 के बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार ने भी लालू यादव के बच्चों को लेकर कहा था कि विकास के नाम पर इसके अलावा लालू यादव ने बिहार में किया ही क्या है?

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लालू यादव को परिवारवाद की राजनीति से तो कोई फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि वो तो डंके की चोट पर कह चुके हैं कि वारिस बेटा नहीं होगा तो क्या भैंस चराएगा. लेकिन लालू यादव की विरासत संभाल रहे तेजस्वी यादव की मुश्किलें निश्चित तौर पर बढ़ सकती हैं.

बताते हैं कि तेजस्वी यादव, रोहिणी आचार्य के राजनीति में आने और चुनाव लड़ने के पक्ष में बिलकुल नहीं थे, लेकिन ऐसा इमोशनल मामला है कि कुछ बोलते भी नहीं बन रहा था. जाहिर है तेजस्वी यादव के लिए रोहिणी आचार्य के राजनीति में आने से मुश्किलें तो बढ़ेंगी ही - और परिवारवाद की राजनीति को लेकर बीजेपी के हमले से बचाव कोई कारगर तरीका खोजना होगा.

बिहार के डिप्टी सीएम सम्राट चौधरी भले ही रोहिणी आचार्य पर बयान देकर ट्रोल हो गये हों, लेकिन अब वो काफी सोच समझ कर बयान दे रहे हैं. बिहार बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सम्राट चौधरी ने रोहिणी आचार्य के चुनाव अभियान को लेकर पूछा है, देखते हैं हमारी बची हुई पांच बहनों को लालू जी कब चुनाव मैदान में उतारते हैं?

लगे हाथ बिहार के डिप्टी सीएम विजय सिन्हा ने भी कह रहे हैं, जनता को सिंगापुर की बहू और बिहारी प्राइड में से किसी एक को चुनना है. आपको याद होगा चुनावों में लालू परिवार की तरफ से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को लेकर भी बाहरी के नाम पर ऐसे हमले बोले जाते रहे हैं, और डीएनए पर मचा बवाल तो शायद ही कभी भूला जा सके.

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रोहिणी की वजह से लालू परिवार में भी कलह बढ़ेगा

बड़ी बेटी होने की वजह से मीसा भारती पहले से परिवार और पार्टी में सक्रिय और प्रभावी रही हैं. तेजस्वी यादव के हाथ में कमान आने से पहले तक संगठन में भी कार्यकर्ताओं के बीच उनकी पैठ गहरी रही है, लेकिन विरासत के मामले में बेटे और बेटी के भेदभाव भरे माहौल में वो पिछड़ गईं - और अब तो उनकी राजनीति भी काफी हद तक तेजस्वी यादव की कृपा पर भी टिकी हुई है.

आरजेडी से रामकृपाल यादव की बगावत के बाद मीसा भारती पहली बार पाटलीपुत्र सीट से लोकसभा चुनाव के मैदान में उतरी थीं, लेकिन हार का मुंह देखना पड़ा था. और 2019 में एक बार फिर वैसा ही नतीजा देखने को मिला - और अब तीसरी बार वो फिर से रामकृपाल चाचा के खिलाफ ही चुनाव मैदान में उतरने जा रही हैं.

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मीसा भारती को ये मौका तो लालू यादव की बेटी होने की वजह से ही मिल रहा है, वरना दो बार चुनाव हारने के बाद तो किसी भी नेता के लिए मुश्किल ये होता है कि किस मुंह से टिकट मांगे. रोहिणी आचार्य भी लालू यादव की बेटी के रूप में भी चुनाव मैदान में होंगी - और बीजेपी उम्मीदवार को कहां तक चुनौती दे पाएंगी, देखना होगा.

अगर पारिवारिक विवाद नहीं होता तो रोहिणी आचार्य से पहले तेज प्रताप यादव की पत्नी ऐश्वर्या को ये मौका मिला होता, तस्वीर का दूसरा पहलू ये है कि रोहिणी आचार्य ने राजश्री यादव का रास्ता रोक लिया है - आखिर तेजस्वी यादव भी तो राजश्री को वैसे ही संसद भेजना चाह रहे होंगे, जैसे यूपी में अखिलेश यादव ने डिंपल यादव को मैनपुरी से लोकसभा भेजा हुआ है.

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मनोज शर्मा

मनोज शर्मा (जन्म 1968) स्वर्णिम भारत के संस्थापक-प्रकाशक , प्रधान संपादक और मेन्टम सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं।

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