बिना कुछ कहे पीएम मोदी ने कर दिया कुछ ऐसा, बढ़ गई शी जिनपिंग की धुकधुकी

PM Modi Oath Ceremony: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 3.0 के शपथग्रहण में कल 7 देशों के लीडर्स शामिल हुए जिसमें मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू भी थे. शपथग्रहण समारोह के बाद दोनों नेताओं की मुलाकात भी हुई और साथ में डिनर भी किया. शपथग्रहण के बाद ज

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PM Modi Oath Ceremony: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 3.0 के शपथग्रहण में कल 7 देशों के लीडर्स शामिल हुए जिसमें मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू भी थे. शपथग्रहण समारोह के बाद दोनों नेताओं की मुलाकात भी हुई और साथ में डिनर भी किया. शपथग्रहण के बाद जब मोदी के साथ ये 7 देशों के नेता शामिल हुए तब वहां पीएम मोदी की साथ वाली कुर्सी पर मुइज्जू ही बैठे थे. भारत विरोधी एजेंडे के जरिए अब तक अपना काम चलाने वाले मुइज्जू का ये बदलाव देखकर चीन ज़रूर अंदर तक परेशान हो उठा होगा. विदेश नीति में कई बार सिर्फ तस्वीरों से ही संदेश पहुंचा दिया जाता है और इस बार भारत ने बिना कुछ कहे सबकुछ कह दिया.

मोदी का मास्टर स्ट्रोक

तीसरे टर्म के शपथ लेने के ही दिन पीएम मोदी ने बड़ा मास्टरस्ट्रोक जड़ दिया. क्योंकि मोदी के शपथ ग्रहण की जो तस्वीरें दुनियाभर में वायरल हो रही हैं, उनके जरिए भारत ने दुश्मन देशों को कई कूट संदेश भेज दिए हैं. दरअसल भारत ने कूटनीति का ऐसा दांव चला है जिससे भारत विरोधी भी दिल्ली में पीएम मोदी के शपथ ग्रहण में हंसते-हंसते शरीक हुए.

इसमें सबसे खास तस्वीर हैं मोहम्मद मुइज्जू की. जिन्हें चीन की कठपुतली माना जाता हैं. India Out का नारा लगाकर मालदीव की सत्ता में आये मोइज्जू शुरुआत में भारत के खिलाफ रोजाना कड़वी बातें करते थे लेकिन अब खुशी से खुद आकर पीएम मोदी के शपथ ग्रहण में शामिल हुए. ऐसे में लाजिमी है कि उनका यहां आना जिनपिंग को खूब चुभा होगा.

सात पड़ोसी देशों के राष्ट्राध्यक्षों की ये तस्वीर मोदी द्वारा रचे गए सात चक्रव्यूह के बराबर

जिनपिंग की विदेश नीति चाहकर भी इन्हें भारत के प्रभाव से दूर नहीं कर पा रही है और न आगे कभी ऐसा करने में कामयाब हो पाएगी.

पीएम मोदी के शपथ ग्रहण में बांग्लादेश, श्रीलंका, भूटान ,नेपाल, मॉरीशस, सेशल्स सहित कई देशों के राष्ट्राध्यक्षों पीएम के शपथ ग्रहण में शामिल हुए. लेकिन सबसे ज्यादा लाइमलाइट मुइज्जु को मिली. पिछले 8 महीनों से मालदीव और भारत के बीच तनाव रहा. पर अब मुइज्जू ने दिल्ली आकर चीन के विस्तावादी प्लान को फेल कर दिया.

विदेश मामलों के जानकार रोबिंदर सचदेव का कहना है कि मालदीव का लीडर और काडर दोनों अपनी गलतियों को समझ रहे हैं. उसने सत्ता में आने के लिए जो इंडिया आउट कैंपेन चलाया. वो उनको भारी पड़ता दिख रहा है. उसको रियलिटी दिख रही है. ऐसे में मुइज्जू का आना डेफिनेटली दिखाता है कि वो एक तरह से भारत के साथ अपने रिश्तों को इंप्रूव करना चाह रहा है.

मालदीव में जब भी कोई राष्ट्रपति पद संभालता है तो वो सबसे पहले भारत की यात्रा करता है..पर मुइज्जू ने पहले चीन की यात्रा की. राष्ट्रपति बनने के बाद ये पहला मौका है जब मुइज्जू भारत पहुंचे थे. दिल्ली आकर मुइज्जू अब भारत-मालदीव संबंधों को वापस पटरी पर ला रहे हैं. इसे मालदीव की तरह से भारत के साथ संबंधों को सुधारने का नया चैप्टर भी माना जा रहा है.

मुइज्जू के आने की एक और वजह संभव है..मालदीव की इकॉनमी Tourism पर निर्भर है और भारत-मालदीव के संबंध बिगड़ने के बाद से मालदीव में भारतीय Tourists की संख्या काफी घट गई. यानी बातें चाहे जितनी बड़ी-बड़ी कर ली जाएं अंदरखाने तो मालदीव को नुकसान हो रहा है. मोइज्जू को भारत ने अपनी नेबरहुड फर्स्ट यानी पड़ोसी पहले की पॉलिसी के तहत न्यौता दिया और मुइज्जू ने इस मौके को हाथ से जाने नहीं दिया.

मोदी की विदेश नीति 'नेबरहुड फर्स्ट' और एक्ट ऐट ईस्ट

- 'नेबरहुड फर्स्ट' पॉलिसी भारत की विदेश नीति का मूल हिस्सा रहा है. 2014 में पीएम मोदी ने कहा था कि वो पड़ोसी देशों को अपनी विदेश नीति में सबसे ऊपर रखेंगे. चीन के बढ़ते प्रभाव को काउंटर करने के मकसद से इस पॉलिसी को शुरु किया गया. पड़ोसियों का ध्यान रखने की इस नीति के तहत भारत ने श्रीलंका को 4 अरब ड़ॉलर की मदद दी. और महामारी के दौरान बांग्लादेश और नेपाल को वैक्सीन की सप्लाई की थी.

मुइज्जू के अलावा बांग्लादेश की प्रधानमंत्री शेख हसीना, नेपाल के पीएम पुष्प कमल दहल प्रचंड, श्रीलंका के राष्ट्रपति रानिल विक्रमसिंघे, भूटान के प्रधानमंत्री दाशो शेरिंग तोबगे, मॉरीशस के पीएम प्रविंद जुगनॉथ और सेशेल्स के राष्ट्रपति अहमद अफीक भी आये.

सभी मेहमानों के लिए दिल्ली में सुरक्षा के जबरदस्त इंतजाम किये गये. 2500 से ज्यादा जवानों को तैनात किया गया. एयरपोर्ट से होटल और शपथग्रहण के वेन्यू तक ड्रोन्स से निगरानी हुई. पूरी दिल्ली नो फ्लाई जोन रही.

ऐसे में इस समय पूरी दुनिया की नजर भारत के इन सात मेहमानों पर टिकी है. जिनकी वजह से भारत की कूटनीतिक और रणनीतिक स्थिति मजबूत हो रही है. पड़ोसी देश होने के बावजूद भी चीन-पाकिस्तान को न्योता नहीं दिया गया और भारत ने अगले 5 सालों का एजेंडा साफ कर दिया.

भारत के पड़ोसी देशों के बीच चीन की घुसपैठ रोकने के लिए मालदीव जरूरी है. चीन के विस्तारवाद को कंट्रोल करने के लिये मालदीव जरूरी है. यानी मोदी 3.0 में चीन के मोहरे का इस्तेमाल करके जिनपिंग के सपनों पर फुल स्टॉप लगाया जाएगा.

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मनोज शर्मा

मनोज शर्मा (जन्म 1968) स्वर्णिम भारत के संस्थापक-प्रकाशक , प्रधान संपादक और मेन्टम सॉफ्टवेयर प्राइवेट लिमिटेड के मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं।

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