हर आलोचना ‘राजद्रोह’ नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने अंग्रेजों द्वारा भारतीय आजादी के क्रांतिकारियों के विद्रोह को दबाने के लिए 152 वर्ष पहले बनाए गए राजद्रोह कानून की धारा 124ए पर पुनर्विचार की अनुमति देते हुए अगले आदेश तक के लिए रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण, जस्टिस सूर्य

ब्रह्माण्ड की गुत्थियों को सुलझाता मन

डॉ. वीर सिंह

मानव मन कभी किसी चीज से इतना आश्चर्यचकित नहीं हुआ जितना ब्रह्माण्ड से। ब्रह्माण्ड के सभी पहलू सदैव से ही मानव के लिए एक पहेली रहे हैं। यहाँ तक कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी की लम्बी छलांगों से भी हमारे ब्रह्माण्ड की सम्पूर्ण जानक

मलेरिया से जंग में भारत के सामने क्या चुनौतियां हैं?

प्रो. एन.के. गांगुली

इस समय पूरी दुनिया कोविड-19 महामारी से उबरने के लिए विभिन्न रणनीतियों पर मंथन कर रही है और शायद यही सही समय है कि वेक्टर रोग जनित जानलेवा बीमारी मलेरिया पर भी बात की जाये और इसके उन्मूलन की सार्थक रणनीति बनाई

पाकिस्तान राजनीतिक आक्षेप और इसकी विदेश नीति के संभावित प्रक्षेपवक्र

डॉ. मनन द्विवेदी, शोणित नयन

भारत और पाकिस्तान के द्विपक्षीय संबंधों की बुनियाद
भारत और पाकिस्तान के द्विपक्षीय संबंधों की कोलाहल इस बुनियाद पर टिकी हुई है, कि देश में अराजक, अंधव्यवस्थात्मक और राजनीतिक रूप से अस्थिर स्थिति के कारण पाकिस

पुलिस और राजनीति… तेल और पानी का मेल

हर किसी का सम्मान नहीं किया जाता और हर कोई सम्मान का हकदार भी नहीं होता। दरअसल, सम्मान हृदय का भावोद्गार होता है जो उस खास के प्रति व्यक्त किया जाता है, जिसका संपर्क—सान्निध्य हमें उल्लासित करता है, प्रेरणा देता है, मार्गदर्शन करता है और हौसला बढ़ा

क्रांतिकारी मंगल पांडेय की पुण्यतिथि पर विशेष: वह क्रांतिकारी जिसे लक्ष्मी बाई, भगत सिंह ने माना आदर्श

उमा शंकर पांडेय

15 अगस्त का दिन हमारे देश में स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है। मन में देश प्रेम की भावना जागृत होती है, हम इस दिन देश को आजाद कराने वाले शहीदों को सम्मान के साथ स्मरण करते हैं। इन देशभक्तों की वजह से हमारा देश स्वत

चीन, सेना और सऊदी अरब के त्रिकोण में फंस गए इमरान खान

प्रेम शुक्ल

पाकिस्तान इस समय राजनीतिक बदहाली के दौर से गुजर रहा है, उसकी इस राजनीतिक बदहाली के मूल में उसकी आर्थिक बदहाली है। दुनिया इस तथ्य से भली-भांति अवगत है कि पाकिस्तान का सत्ता केंद्र निर्वाचित सरकारों की बजाए पाकिस्तानी से

उत्कल दिवस विशेष: ओडिशा को क्यों कहते हैं भारत की आत्मा? जान लीजिये

मनोज दास

एक अप्रैल को उत्कल दिवस मनाया जाता है। ‘उत्कल’ पूर्वी भारत के ओडिशा राज्य का का प्राचीन नाम है। यह क्षेत्रफल के हिसाब से देश का 8वां सबसे बड़ा और जनसंख्या के हिसाब से 11वां सबसे बड़ा राज्य है। ओडिशा अपने प्राचीन हेरिटेज स

अहम और जिद के कारण तीसरे विश्वयुद्ध के मुहाने पर दुनिया

बच्चों जब ज़िद पर अड़ते हैं तो उन्हें बहला—फसलाकर, प्यार से मना लिया जाता है, लेकिन यदि राष्ट्राध्यक्ष अपने राष्ट्र सहित दूसरे राष्ट्र का नाश करने के लिए जिद पर उतारू हो जाए तो उसे कौन और कैसे समझाए? रूस-यूक्रेन के बीच जारी जंग में यही तो देखने के

हिजाब विवाद: कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले पर क्यों मचा है बवाल?

बीते दिनों में कर्नाटक हाई कोर्ट ने गणवेश में हिजाब के मामले पर एक फैसला सुनाया। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ में न्यायमूर्ति कृष्णा दीक्षित और न्यायमूर्ति जेबुन्निसा मोहिउद्दीन शामिल थे। इस खंडपीठ ने

कांग्रेस नहीं, भाजपा के लिए खतरे की घंटी है ‘आप’

आखिर पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपना जलवा कायम रखा। अब कोई कितना भी विश्लेषण क्यों न करे, कितना ही आरोप-प्रत्यारोप क्यों न लगाए, जीत तो जीत ही है, चाहे वह एक मत से ही क्यों न हुई हो। दूसरी बात यह भी कि हारने वाले ने भी तो मेहनत की थी। स्वाभाविक है, वह अपनी हार से बिलबिलाएगा ही। ह

मेड़बंदी: तपती धरती पर पानी बचाने का जखनी मॉडल

दुनिया में पानी को लेकर कई तरह के शोध और खोजें हो रही हैं, पानी को बचाना और उसको पीने योग्य बनाना आज के समय में एक बड़ी चुनौती साबित हो रही है। दुनिया के कई ऐसे देश हैं, जहां पीने योग्य पानी को पाने के लिए लोगों को काफी मेहनत करनी पड़ रही है। करीब-करीब दुनिया के सभी देशों में पेयजल की समस्या गहरा

परमाणु हमले की आशंका के बीच ‘दोस्ती’ निभाने की चुनौती

जापान यात्रा के दौरान हिरोशिमा में जिनके यहां हम ठहरे थे उन्होंने अपने 6 अगस्त, 1945 दिन का दुखद और हृदय विदारक संस्मरण सुनाते हुए कहा था कि उस दिन वह शहर से बाहर थे। परमाणु विस्फोट के बाद जब वह वापस आए तो उनके परिवार का कोई सदस्य जिंदा नहीं बचा था। जो लोग जिंदा बच गए थे, उन्होंने विस्फोट की भयाव

Ukraine Russia War: अपने ही बुने जाल में उलझता रूस

सरहद से सटे देशों के बीच युद्ध कोई नई बात नहीं है। ऐसा काफी पहले से होता आ रहा है। पहले तीर-तलवारों से युद्ध लड़ा जाता था, अब अत्याधुनिक हथियारों, यहां तक कि अणुबम और परमाणु जैसे खतरनाक हथियारों से युद्ध लड़ा जाने लगा है। रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने अपने परमाणु हथियार चालक को जिस प्रकार हाई अलर

ये आतंकी हमला भर नहीं, युद्ध है और इसमें EU यूक्रेन के साथ है

अनुरंजन झा, इंग्लैंड से

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे जंग को एक हफ्ते हो गए हैं। रूस को शायद पहले ये उम्मीद रही होगी कि यूक्रेन को वो 24 से 48 घंटे में निपटा लेगा, क्यूंकि उसे ये तो यकीन था ही कि नेटो देश अपनी सैन्य शक्तियों के साथ यूक्रेन की तरफ हाथ नहीं बढ़ाएंगे क्यूंकि वो कदम तीसरे

Russia- Ukraine War: यूक्रेन पर रूस का हमला और नाटो की भूमिका के मायने

अनुरंजन झा, इंग्लैंड से

यूक्रेन पर रूस के हमले के 8 घंटे के बाद नाटो ( नार्थ एटलांटिक ट्रीटी आर्गनाइजेशन) एक्टिव हुआ है। गुरुवार की सुबह जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तो सबसे अहम सवाल यही था कि यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद अब ब्रिटेन, दूसरे यूरोपीय देश या नाटो क्या करेगा ? रूस और यू

चुनावों में हराया, पर बीजेपी ने ही कांग्रेस को ज‍िंदा भी क‍िया, अपनी ग‍िरेबां में भी झांकने की ह‍िम्‍मत द‍िखाए सरकार

पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चंद्रशेखर ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि युगोस्लाविया के एक प्रोफेसर ने, जो सारी दुनिया में ‘शरणार्थियों की समस्या’ पर शोध कर रहे थे, उनके एक प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा था कि ‘हमारे देश में महात्मा गांधी को भी गरीबी के दर्द का अनुभव तब हुआ, जब दक्षिण अफ्रीका में उन्हे

वोटों की बीन पर नाचता लोकतंत्र!

वीर सिंह

पांच राज्यों के वर्तमान चुनाव काल में आप पश्चिम बंगाल का विगत चुनाव तो नहीं भूले न? चुनाव जीतने के बाद बहुमत वाली पार्टी के कार्यकर्ताओं ने किस तरह से विरोधी पार्टी को वोट देने वाले सामान्य लोगों के घर जलाए, हत्याएं की, और कितने ही लोगों को पड़ोसी राज्यों में शरण लेने के लिए

क्षणिक लोभ और पांच साल का मरोड़

तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने और अंग्रेजों ने भारत को ऐसा समाज कहा था जो लोकतंत्र को न पचा पाएगा, न इसे संभालकर आगे बढ़ा पाएगा और कुछ ही समय में खंड—खंड में बंटकर स्वतः नष्ट हो जाएगा। इसके पीछे की वजह यहां के राजनीतिज्ञों की अयोग्यता और अनुभवहीनता बताई गई और कहा गया कि सत्ता स

UP Election Blog: आसान नहीं है ‘आईने’ से सवाल पूछना

समझ में नहीं आता कि हम आज भी बेवजह की बातों पर बहस करके अपना समय जाया करते रहते हैं। उसमें भी आज के चुनावी दौर में। कभी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, कभी नेहरू, तो कभी जिन्ना को बीच में लाकर खुद को राष्ट्रभक्त साबित करने में जुट जाते हैं। संभव है इसके प्रमुख दो कारण हों। पहला यह कि देश में जो बेर

मंदिरों में दलितों के प्रवेश के लिए लड़े, ‘विशिष्टाद्वैत’ सिद्धांत दिया; जानिये- स्वामी रामानुजाचार्य के बारे में सबकुछ

शुभांगी उपाध्याय
भारतवर्ष पर सैकड़ों वर्षों से ही अनगिनत आक्रमण होते आए हैं परन्तु इसकी अखण्डता को अक्षुण्ण रखने हेतु अनेकों वीर, महात्मा, संत, कवि आदि ने इस भूमि पर जन्म लिया और हर प्रकार से इसकी रक्षा की। ऐसा ही एक दौर था आज से लगभग हजार वर्ष पूर्व, जब भारत की अस्मिता पर आँच आई थी। विदेश

Election 2022: …ये चुनावी वादे हैं, आगे जुमले बन जाएंगे!

संविधान निर्माताओं ने चुनाव का नियम लोकतंत्र की पवित्रता को बनाए रखने के लिए तैयार किया था। उनका मानना था कि यदि पांच साल में जनता अपने ‘शासक’ से ऊब जाए तो नए और स्वच्छ छवि वालों और शिक्षित लोगों को चुनकर देश की श्रेष्ठ पंचायत में भेज सकती है, जो उनकी समस्या सर्वोच्च पटल पर रखकर उससे निजात दि

क्या सच में सिद्धू का कृत्य ‘राष्ट्रवाद’ से अलग है?

सब जानते हैं कि नवजोत सिंह सिद्धू भारत के लिए और इमरान खान पाकिस्तान के लिए क्रिकेट खेलते थे, लेकिन यह जानकारी शायद किसी को नहीं होगी कि इनकी दोस्ती ऐसी भी है कि लोगों की अंगुली सिद्धू को ‘गैर राष्ट्रवादी’ ठहराने में उठने लग जाए। पाकिस्तान का जन्म ही भारत के विरोध के लिए हुआ था, जिसे हम आज तक

मजबूत और जीवंत है भारतीय गणतंत्र

एक गणतंत्र को देशवासियों द्वारा सुदृढ़ और जीवंत बनाया जाता है। अपने वर्तमान स्वरूप में,भारतीय गणतंत्र ने गतिशील संतुलन बनाए रखते हुए 73 वर्ष पूरे कर लिए हैं। भारत की बहुलता और विविधता को दर्शाने वाली ताकतों कीखींच-तान से यह अक्सर दबावका अनुभव करता है। इसका श्रेय देशवासियों को दिया जाना चाहिए क

UP Election:अनूठे दल बदल वाला चुनावः पिक्चर अभी बाकी है…

डॉ.संजीव मिश्र

उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। दल-बदल से लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है। चुनाव आयोग की सख्ती से बड़ी जनसभाओं और गली-गली लाउडस्पीकर का शोर तो नहीं सुनाई दे रहा है, किन्तु सोशल मीडिया के मैदान में नए-नए अस्त्र-शस्त्र

भ्रामक तथ्य नहीं कर सकते ‘बापू’ का कद छोटा

पिछले कुछ वर्षों से ऐसा लगता है जैसे देश में हिंदू-मुसलमानों के बीच के रिश्तों में नेताओं ने राजनीतिक आंधी चला दी हो। रोज सुबह से ही कोई भी पक्ष एक—दूसरे को नीचा दिखाने में पीछे हटता नजर नहीं आता है। यहां तक कि दोनों कौम के बीच ऐसा जहर भर दिया गया है कि आम आदमी की कौन कहे, खुद राष्ट्रपिता महा

कोरोना से लेकर बेरोजगारी तक: नए साल में भारत के सामने हैं ये चुनौतियां

डॉ. संजीव मिश्र

वर्ष 2021 बीत चुका है। वह वर्ष जिसने हममें से अधिकांश के आसपास तनाव, दुख व कष्ट का वातावरण सृजित कर दिया था। कोरोना से देश में हुई मौतें और कई बार इलाज भी न करा पाने का दर्द आज भी लोगों को पीड़ा की अनुभूति करा रहा है। ऐसे में वर्ष 2022 हर नए वर्ष की तरह उम्मीदों की प

पूर्ण टीकाकरण अभियान से ही कोरोना के तीसरी लहर को रोकना है संभव

कोरोना के नए वैरिएंट ओमीक्रॉन को लेकर दुनिया ही नहीं, भारत में भी चिंता बढ़ गई है। सरकारी स्तर पर इससे निबटने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। देश में हम राज्य सरकारों के कोरोना टीकाकरण अभियान की बात करें, तो निःसंदेह मध्य प्रदेश सरकार ने बेहतर प्रतिमान स्थापित किया है। लगभग पूरी वयस्क आब

पाकिस्तान के मूल में ही द्वेष

भारत विभाजन के लगभग तय हो जाने पर न्यूयॉर्क टाइम्स के संवाददाता हरबर्ट एल मैथ्यूज जिन्ना से मिले। बातचीत के क्रम में उन्होंने जिन्ना का ध्यान उन बातों की ओर आकृष्ट किया जिन पर तमाम लोगों का भविष्य निर्भर करता था। उन सबका जिन्हें उन प्रदेशों में रहना था जो पूरे भारत से अलग किए जाते। मैथ्यूज ने

ओमिक्रोन : खतरा है बड़ा, रहें सतर्क और सावधान

भारत समेत 60 से अधिक देशों तक फैल चुके कोरोना के नए वैरिएंट ओमक्रोन के चलते ब्रिटेन में विश्व की पहली मौत हुई है । ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने इसकी पुष्टि की है । नए वेरिएंट की बढ़ती रफ्तार को थामने के लिए आज विश्व में जहां नाना तरह के उपाय खोजे जा रहे हैं, वहीं कुछ शोधकर्ताओं का म

हार में भी जीत तलाशती सरकार

भारतीय कृषि क्षेत्र में ‘व्यापक सुधार’ लाने एवं किसानों की आमदनी दोगुना करने की नीयत से केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा लाए गए तीन नए कृषि कानून धरातल पर आने से पहले ही दफन हो गए। किसानों, जिन्हें सरकार ने आंदोलनजीवी, फर्जी प्रदर्शनकारी, खालिस्तानी आतंकी तक कहने से नहीं चूकी, के एक साल स

यह राजनीति है… जरा तोल—मोल के बोल

निशिकांत ठाकुर

वंशवाद या परिवारवाद शासन की वह पद्धति है जिसमें एक ही परिवार, वंश या समूह से एक के बाद एक कई शासक बनते जाते हैं। माना जाता है कि लोकतंत्र में वंशवाद के लिए कोई स्थान नहीं है, इसके बावजूद कई देशों में आज भी वंशवाद हावी है। दरअसल, वंशवाद, निकृष्टतम कोटि का आरक्षण है। हा

कृषि कानून पर “बैकफुट” या प्रधानमंत्री का ” मास्टर स्ट्रोक”

निशिकांत ठाकुर

ऐसा क्या हो गया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अचानक तीनों कृषि सुधार कानून वापस लेने का निर्णय करना पड़ा? निश्चित रूप से उन्होंने माहौल को भांपने के लिए किसी एजेंसी का सहारा लिया होगा और उसके नेगेटिव फीडबैक ने उन्हें उनके इस कदम पर चौंकाया होगा कि उन्हें इन तीनो कृ

खंड-खंड में बंटना नियति नहीं, प्रवृति है

इस बार भारतीय इतिहास और उसके जनसमूह की भावनाओं को सैकड़ों वर्षों तक किस प्रकार विदेशी आक्रांताओं ने रौंदा है, उसके ऐतिहासिक संदर्भों में कुछ जानने कोशिश करते हैं। यह मेरे मन का उद्गार नहीं है, अपितु वह कुछ है जिसे मैंने बहुत गहनता से पढ़ने के बाद कुछ समझने का प्रयास किया है। जब फतह करने वालों

बर्तनों में खटपट ‘समावेशी’ होती है, विद्रोही नहीं

निशिकांत ठाकुर

प्रसिद्ध पुर्तगाली इतिहासकार फरी सौजा ने ‘दक्षिण के हालात’ में लिखा है कि ‘हिंदू और मुसलमान एक—दूसरे की सेवा करते थे और मुसलमान राजा हिंदुओं को उच्च और सम्मानित पदों पर नियुक्त किया करते थे। यानी, इस समय हिंदुओं के विरुद्ध कोई भेदभाव नहीं था। वह बिना किसी बाधा के अपने

इन ‘बाहुबलियों’ के लिए कौन बनेगा ‘कटप्पा’

भारतीय राजनीतिज्ञ निरीह आम जनता पर कितना और अत्याचार करेंगे। कितना झूठ बोलेंगे, उन्हें कितना गुमराह करेंगे, कितने नए जुमले रचेंगे – गढ़ेंगे । उसके बल पर कितने दिनों तक शासन चलाएंगे? जरा सोचिए और लखीमपुर खीरी प्रकरण के जीवंत वीडियो देखिए। क्या आपको लगता है कि निरपराध किसान, जो सामान्य रूप से अ

सात दशक के बाद घने जंगलों में बना एक स्वास्थ्य केंद्र

मधुरेंद्र सिन्हा

क्या आप सोच सकते हैं कि आजादी के 74 वर्षों के बाद भी देश के कई हिस्सों में स्वास्थ्य सेवाएं हैं ही नहीं। वहां लोग अस्पताल, डॉक्टर, नर्स कुछ भी नहीं जानते। वहां बैगा यानी झाड़-फूंक करने वाला ही उनका डॉक्टर है। सैकड़ों साल पुरानी परंपराएं हैं जिन पर उनका अगाध विश्वास

कैसी होगी पंजाब में कैप्टन बिन कांग्रेस?

सुव्यवथित ढंग से चल रहे देश का एक महत्वपूर्ण और कर्मठ राज्य ‘मसखरों’ के चक्कर में कांग्रेस के हाथ से छिटकता नजर आ रहा है। राजनीति में पद नहीं, कद की बात की जाती हैं, लेकिन कांग्रेस सुप्रीमो की समझ में यह बात नहीं आई और एक जीते हुए राज्य के कद्दावर नेता को बहकावे में आकर उन्हें अयोग्य करार दिय

हत्या के बाद पलायन और नीतिश सरकार का ‘राग कश्मीरी’

कश्मीर से एक बार फिर मजदूरों का पलायन शुरू हो गया है। पलायन करने वालों की शिकायत स्थानीय लोगों से नहीं, बल्कि उनसे है जो चाहते हैं भारत हिंदू-मुस्लिम के बीच उलझा और बंटा रहे, जिससे आतंकी उनके बीच की दलाली करके अपना उल्लू सीधा करता रहे। अगर ऐसे लोग हमारे बीच के स्लीपर सेल जैसा काम कर रहे हैं त

उन लाखों योद्धाओं को सलाम जिन्होंने 100 करोड़ का लक्ष्य दिलवाया

मधुरेंद्र सिन्हा

भारत ने वह कर दिखाया जो दुनिया के किसी भी देश के लिए एक सपना है। 100 करोड़ लोगों को कोरोना का टीका लगाकर हमने एक कीर्तिमान बनाया है। यह संख्या यूरोप-अमेरिका और जापान की कुल आबादी से भी ज्यादा है। इसे आप भारत की जनता की प्रतिबद्धता कहें या चाहत, बात साफ है कि सब ने म

‘सोने की लंका’ वाले रावण के गांव में सड़क तक नहीं, दशहरे पर ग्रेटर नोएडा का बिसरख मना रहा शोक!

मयंक दीक्षित

यूं तो ग्रेटर नोएडा की पहचान अंग्रेजी नामों पर बनी बहुमंजिला इमारतें हैं, लेकिन यहां के बिसरख गांव का पौराणिक महत्व भी है। कहा जाता है कि इस गांव में रावण का जन्म हुआ था। माना जाता है कि रावण के पिता विश्रवा ऋषि के नाम पर ही गांव का नाम ‘बिसरख’ पड़ा। सोने की लंका में शा

क्या खाद्य असुरक्षा की तरफ बढ़ रही है दुनिया? समझें पूरी तस्वीर

डॉ. वीर सिंह
पूर्व प्राध्यापक, जीबी पंत कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय

स्वर्गीय सुंदरलाल बहुगुणा कहते थे कि मनुष्य ने जब पहली बार हल चलाया था तो उसने उसी दिन अपने विनाश की कहानी लिख दी थी। बात अटपटी-सी लगती है, लेकिन इसमें एक गहरा दर्शन छिपा है, और सुदीर्घ भविष्य का सत्य भी।

दिल्ली विश्वविद्यालय का वो ऐतिहासिक फैसला, जो बदल सकता है पठनपाठन की पूरी तस्वीर

डॉ. नित्यानंद अगस्ती

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में पिछले दिनों कुछ ऐतिहासिक हुआ, जो हर तरफ चर्चा का विषय बना। पहली बार विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों के शिक्षकों को प्रमोट कर प्रोफेसर बनाया गया। यह व्यवस्था पहले विवि के विभागों तक ही सीमित थी। तमाम कॉलेजों में कई ऐसे शिक्षक थे, ज

दिल्ली विश्वविद्यालय का वो ऐतिहासिक फैसला, जो बदल सकता है पठन-पाठन की पूरी तस्वीर

डॉ. नित्यानंद अगस्ती

दिल्ली विश्वविद्यालय (डीयू) में पिछले दिनों कुछ ऐतिहासिक हुआ, जो हर तरफ चर्चा का विषय बना। पहली बार विश्वविद्यालय से संबद्ध कॉलेजों के शिक्षकों को प्रमोट कर प्रोफेसर बनाया गया। यह व्यवस्था पहले विवि के विभागों तक ही सीमित थी। तमाम कॉलेजों में कई ऐसे शिक्षक थे, ज

अब तो रोज हो रही गांधी की हत्या

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी यदि जीवित होते तो आज 152 वर्ष के हो गए होते और 2 अक्टूबर को अपना जन्मदिन मना रहे होते। लेकिन, 30 जनवरी, 1948 को उनकी हत्या कर दी गई जिसे आज लगभग 74 वर्ष हो गए हैं। अब तक जैसा मैंने देखा कि आम लोगों के मन में गांधी जी के प्रति असीम श्रद्धा है। एक तरह से भारतीय जनमानस

सट कर रहो या हट कर… खतरा दोनों जगह

पिछले कुछ दिनों में माननीय सुप्रीम कोर्ट ने जनहित में कई ताबड़तोड़ निर्णय देते हुए भारतीय जन मानस को यह विश्वास स्थापित करने का प्रयास किया है कि उनके हृदय में यह विश्वास- संतोष बना रहे कि अभी भारतीय न्यायपालिका नींद से बोझिल सरकार को जगाने तथा भ्रष्ट नौकरशाहों लिए न्याय का न्यायिक डंडा तैयार

आपकी डिजिटल लाइफ कहीं निजता न खत्म कर दे?

जितेंद्र पारख एवं अभिनव नारायण झा
कोरोना वायरस के कई प्रभावों में से एक प्रभाव यह भी है कि इस महामारी ने अधिक से अधिक लोगों को डिजिटल अर्थव्यवस्था में भाग लेने के लिए मजबूर किया है। डिजिटल युग में जहां तमाम सरकारी और निजी कार्यक्रम व्हाट्सएप, गूगल, फेसबुक, वेबेक्स आदि डिजिटल एवं सोशल प्लेट

हिंदी फ़िल्मों में ही हिंदी की दुर्दशा! कौन है इस स्थिति का जिम्मेदार?

डॉ मनीष जैसल

जनमानस की भाषा होने के बावजूद हिंदी दिवस मनाने की ज़रूरत ही क्यों पड़ती है इस पर पूरे देश के नागरिकों को विचार करना चाहिए। सालों तक ब्रिटिश हुकूमत के ग़ुलाम रहने के कारण इसका असर हमारी भाषा और संस्कृति पर भी पड़ा है। लेकिन अब ग़ुलामी को भी एक लम्बा समय हो चुका है।आज़ादी

ममता और करुणा की प्रतीक मां और मातृभूमि

डॉ. दिनेश चंद्र सिंह

मां और मातृभूमि की महिमा शब्दों में बयां नहीं की जा सकती। क्योंकि वह अपरंपार होती है। मां के पालन-पोषण से ही हर तरह का व्यक्तित्व सजता-संवरता-निखरता है। सारा संसार जनता और मानता आया है कि व्यक्तित्व निर्माण की पहली पाठशाला मां है, उसकी ममतामयी गोद है और उसकी बाल

भारत के सुसंस्कारों और अस्मिता की भाषा है हिंदी

डॉ. वीर सिंह

कुछ वर्ष पूर्व उदयपुर स्थित एक विश्वविद्यालय में मेरा परिचय एक व्यक्ति से यह कह कर कराया गया कि वह इलाहाबाद विश्वविद्यालय के भूतपूर्व प्राध्यापक हैं। मैंने पूछा किस विषय के, तो प्राध्यापक महोदय के बताने से पहले ही मेरे मित्र ने कहा तहजीब की भाषा के? “तहजीब? वह कौनसी भाष

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