हिंसक होते बच्चे

पर अगर कम उम्र के कुछ बच्चे भी मामूली बात पर हिंसक होने लगें, यहां तक कि जानलेवा हमला और हत्या तक करने लगें, तो इसे गंभीर चेतावनी के तौर पर देखा जाना चाहिए। दरअसल, पिछले दिनों ऐसी कई घटनाएं सामने आर्इं, जिनमें किसी किशोर ने मामूली बात पर किसी की जा

बदहाली के स्कूल

हर अध्ययन रिपोर्ट में इस समस्या को स्कूली शिक्षा में सुधार की सबसे प्राथमिक जरूरत के तौर पर दर्ज किया जाता रहा है। हालांकि शिक्षा की तस्वीर बेहतर बनाने का मकसद हमेशा ही घोषित तौर पर सभी सरकारों की कार्यसूची में सबसे ऊपर ही रहा है। मगर हकीकत यह है क

शासन और अनुशासन

अधिकारियों को वे सीधे आदेश देते हैं। तब वह मामला अदालत में पहुंचा था और अदालत ने स्पष्ट रूप से कहा था कि चुनी हुई सरकार को अपने ढंग से काम करने का अवसर मिलना चाहिए। उसके बाद कुछ सालों तक विवाद लगभग शांत था। मगर दूसरे कार्यकाल में वर्तमान उपराज्यपाल

भ्रामक ज्ञान

उन पर भ्रामक सूचनाएं हो सकती हैं। हालांकि अदालत ने यह बात कानूनी मामलों के मद्देनजर कही और न्यायिक अधिकारियों को ऐसे स्रोतों के उपयोग को लेकर आगाह किया है, पर इसे व्यापक संदर्भ में लेने की जरूरत है। आजकल तथ्यों के लिए विकिपीडिया जैसे मंचों पर अध्ये

अनैतिकता के अखाड़े

मगर जिस तरह भारतीय कुश्ती महासंघ के खिलाफ देश के तमाम पहलवान एकजुट होकर उसके अध्यक्ष को हटाने की मांग पर अड़े हैं, वैसा पहले किसी खेल संघ में नहीं हुआ। विश्व चैंपियनशिप की पदक विजेता और ओलंपिक खिलाड़ी विनेश फोगाट ने कुश्ती महासंघ के अध्यक्ष पर महिला

बोली की मर्यादा

लेकिन इस अधिकार के साथ इसकी गरिमा का खयाल रखने की जिम्मेदारी भी लोगों की ही है। अगर इस सुविधा को बेलगाम बोली और बर्ताव की छूट के तौर पर देखा जाएगा तो इस पर सवाल उठेंगे। खासतौर पर किसी जिम्मेदार पद पर बैठ कर कोई जनप्रतिनिधि इस संवैधानिक अधिकार की गर

आतंक के खिलाफ

लेकिन पाकिस्तान ने इस तरह के आरोपों पर कभी गंभीरता से बात नहीं की और न इस व्यापक समस्या के हल में सहयोग के लिए कोई सकारात्मक प्रतिक्रिया दी। उलटे वह भारत की ओर से उठे सवालों को खारिज करता रहा है। जबकि आए दिन ऐसे तथ्य सामने आते रहे, जिसमें यह बार-बा

जीवन के अंग

यही वजह है कि अगर किसी रिश्तेदार या परिजन की मौत होती है तो उसके लिए न सिर्फ दुखी होते हैं, बल्कि समाज और संस्कृति के संदर्भों से जो रिवायतें चली आ रही होती हैं, उसके मुताबिक हर स्तर पर हम मृतक के लिए पूरी भावुकता के साथ उसका पालन करते हैं।

मतदान से दूर

हालांकि जब आयोग ने इसे शुरू करने का प्रस्ताव रखा, तभी इसका विरोध शुरू हो गया था। इसके व्यावहारिक पक्षों को लेकर तरह-तरह के सवाल उठाए और शंकाएं जताई जा रही थीं। निर्वाचन आयोग ने सभी दलों को निमंत्रित किया था कि वे आएं और आरवीएम से संबंधित अपनी शंकाए

राहत का रुख

पिछले हफ्ते दिसंबर में खुदरा महंगाई दर घट कर 5.72 फीसद पर रहने के आंकड़े आए थे। अब थोक महंगाई के 4.95 फीसद पर होने का आंकड़ा आया है। रिजर्व बैंक ने कहा था कि अगर महंगाई की दर छह फीसद तक सिमट जाती है, तो विकास दर में जल्दी सुधार शुरू हो जाएगा।

<

सख्ती का संदेश

दरअसल, राष्ट्रीय राजधानी होने के नाते दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था के स्तर को बाकी जगहों से ज्यादा चौकस माना जाता है। लेकिन अगर इस धारणा के बरक्स हकीकत यह सामने आए कि एक कार में फंसी युवती को बारह किलोमीटर के दायरे में घसीटा जाता रहा और अलग-अलग हिस्

महंगाई से राहत

काफी समय बाद अब इस मोर्चे पर साधारण लोगों के लिए यह राहत की खबर है कि खुदरा महंगाई दर पिछले एक साल में सबसे नीचे पहुंच गई है। दरअसल, बीते साल नवंबर के मुकाबले दिसंबर में खुदरा महंगाई दर में आई कमी ने एक बार फिर यह उम्मीद पैदा की है कि अगर यह स्थिति

हादसों का दायरा

महाराष्ट्र के नासिक में शुक्रवार की सुबह एक तेज रफ्तार बस और ट्रक की टक्कर में कम से कम दस लोगों की जान चली गई और बीस से ज्यादा लोग घायल हो गए। निश्चित रूप से यह आए दिन होने वाली सड़क दुर्घटनाओं की ही अगली कड़ी है, लेकिन ऐसी हर घटना यही बताती है कि क

प्रचार की मर्यादा

अभी सूचना एवं प्रचार निदेशालय यानी डीआइपी ने मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को नोटिस भेजा है कि वे दस दिनों के भीतर सरकारी खजाने में एक सौ चौंसठ करोड़ रुपए जमा कराएं। यह नोटिस उन्हें आम आदमी पार्टी का संयोजक होने के नाते भेजा गया है। डीआइपी का आरोप है

अधिकार की सीमा

किसी न किसी बहाने इस पर सरकार की तरफ से टिप्पणी आ ही जाती है। उपराष्ट्रपति ने एक बार फिर दोहराया कि राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग को लेकर बने कानून को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा खारिज किया जाना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

उन्होंने कहा

विरासत की खातिर

यह न सिर्फ चंडीगढ़ को एक विरासत के रूप में बचाने की फिक्र है, बल्कि एक तरह से विकास के नाम पर चलने वाली उन गतिविधियों पर भी टिप्पणी है, जिसकी वजह से कोई शहर आम जनजीवन से लेकर पर्यावरण तक के लिहाज से बदइंतजामी का शिकार हो जाता है।

गौरतलब है

त्रासदी की जवाबदेही

हालांकि अदालत ने इस पर तत्काल सुनवाई से इनकार करते हुए कहा कि हर जरूरी चीज सीधे न्यायालय के पास नहीं आनी चाहिए। पीठ ने स्पष्ट कहा कि इस पर गौर करने के लिए लोकतांत्रिक रूप से निर्वाचित संस्थाएं हैं। दरअसल, याचिकाकर्ता ने दावा किया कि यह घटना बड़े पैम

जनतंत्र बनाम अराजकता

रविवार को ब्राजील के पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के समर्थक आक्रामक तेवर के साथ उत्पात मचाते हुए संसद भवन, राष्ट्रपति भवन और सुप्रीम कोर्ट में घुस गए और परिसरों पर कब्जा जमाने की कोशिश करने लगे।

गनीमत यह रही कि इस हंगामे का दायरा बढ़ने

अव्यवस्था की उड़ान

ताजा घटना पटना की है, जिसमें दो यात्री नशे की हालत में पाए गए। वे नशा करके विमान में चढ़े थे और जब पटना हवाई अड्डे पर उनकी सांस जांची गई तो तथ्य सामने आया कि उन्होंने मदिरापान कर रखा था। उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की गई।

मगर सवाल है कि जब

उजाड़ने से पहले

कानूनी प्रावधान के मुताबिक सरकार उस जमीन को खाली करा सकती है। यह मसला सतही तौर पर भले अतिक्रमण हटाने का लग सकता है, लेकिन इसके साथ कई ऐसे पहलू जुड़े हुए हैं, जो सरकार को भी कठघरे में खड़ा करती है।

हाल ही में उत्तराखंड के हल्द्वानी में रेलवे

हंगामे का हासिल

उससे यह सवाल एक बार फिर उठा है कि दिन-रात लोकतंत्र की दुहाई देने वाले जनप्रतिनिधियों और पार्टियों के पास इस विचार के प्रति सचमुच कितना सरोकार है। गौरतलब है कि हाल में दिल्ली नगर निगम के लिए चुने गए पार्षदों के शपथ ग्रहण के दौरान पीठासीन अधिकारी के

महंगाई की चिंता

हालांकि वे यह भरोसा दिलाना नहीं भूले कि महंगाई पर काबू पाना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने इस साल आर्थिक विकास दर सात फीसद रहने का अनुमान जताया है, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में करीब पौने दो फीसद कम है। उन्होंने माना कि अगर महंगाई ऊंचे स्तर पर

परिसर का प्रसार

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने फिलहाल विदेशी विश्वविद्यालयों को दस साल के लिए मंजूरी देने का प्रावधान रखा है। उनके प्रदर्शन को देखते हुए नौ साल बाद फिर उनका नवीकरण किया जाएगा। दाखिला प्रक्रिया और शुल्क निर्धारण के मामले में इन विश्वविद्यालयों को स्वत

विवेक की बलि

नए साल की पूर्व संध्या पर जिस तरह एक युवती को कार ने टक्कर मारी फिर उसे कई किलोमीटर तक घसीटती रही, और आखिरकार उसका शव सड़क पर छोड़ कर चली गई, वह हृदय विदारक घटना थी। ऐसी घटनाओं की खबरें देते या उन पर बात करते समय खासी संवेदनशीलता और सावधानी की अपेक्ष

खौफ में स्त्री

आखिर ऐसा क्यों है कि किसी वजह से एक महिला का सड़क पर निकलना खतरे से खाली नहीं है? दूरदराज के इलाकों की हालत तो दूर, शहरों, महानगरों और यहां तक कि देश की राजधानी में भी अगर महिलाएं सुरक्षित और सहज जिंदगी को लेकर निश्चिंत नहीं हैं, तो यह किस तरह का वि

अपराध का दायरा

इसलिए सरकारों की कामयाबी या नाकामी नापने का एक पैमाना कानून-व्यवस्था भी होता है। पंजाब सरकार इस पैमाने पर सफल नजर नहीं आ रही। जबसे वहां आम आदमी पार्टी की सरकार बनी है, आपराधिक घटनाओं में तेजी आई है। यहां तक कि जो संगठित अपराध लगभग शांत पड़ चुके थे,

जोखिम और नियमन

ऐसे तमाम काम हैं, जो इंटरनेट या डिजिटल माध्यम की वजह से पहले के मुकाबले काफी आसान हुए और अब यह आम लोगों की जरूरत भी बन गए हैं। लेकिन इसके साथ यह भी होता गया कि इंटरनेट या इससे जुड़ी तकनीकी लोगों पर इस कदर हावी होने लगी है कि उससे आम जीवन कई स्तरों प

आतंक का सिलसिला

ऐसा तब है जब सरकार की ओर से समूचे इलाके में आतंकवाद से मोर्चा लेने के लिए हर स्तर पर चौकसी बरती जा रही है और अक्सर सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में आतंकवादी मारे भी जा रहे हैं। इसके बावजूद आतंकियों ने जिस तरह डर का माहौल बनाए रखने के लिए निर्दोष लोगो

टकराव की सियासत

राज्यों के विकास में कुछ परियोजनाएं राज्य सरकारें चलाती हैं, तो कुछ केंद्र सरकार। जो महकमे केंद्र के अधीन हैं, उनकी परियोजनाओं का संचालन केंद्र करता है, मगर संबंधित राज्य सरकारों से उनमें अपेक्षित सहयोग की दरकार रहती है। पर जब केंद्र और राज्य में द

जोखिम की दवा

मगर पिछले तीन महीने के भीतर यह दूसरी बार है, जब खांसी से आराम के लिए दी गई दवा से कई बच्चों की मौत की खबर आई। खबरों के मुताबिक, उज्बेकिस्तान के स्वास्थ्य मंत्रालय ने वहां अठारह बच्चों की मौत के लिए भारत में बनने वाली खांसी की दवा को जिम्मेदार ठहराय

सुविधा का मतदान

निर्वाचन आयोग के मुताबिक पिछले आम चुनाव में करीब तीस करोड़ लोग अपने मताधिकार का इस्तेमाल नहीं कर पाए। ऐसा हर चुनाव में होता है। इसलिए लंबे समय से मांग उठती रही थी कि ऐसे लोगों के लिए मतदान का कोई व्यावहारिक उपाय निकाला जाना चाहिए। उसी के मद्देनजर नि

भगदड़ की राजनीति

जो जितना प्रदर्शन कर लेता है, वह उतना ही ताकतवर नेता माना जाता है। इसलिए राजनेताओं और राजनीतिक दलों में प्राय: ऐसे प्रदर्शनों की होड़ नजर आती है। मगर इन प्रदर्शनों में आम लोगों को जो दुश्वारियां झेलनी और कई बार जान गंवा कर कीमत चुकानी पड़ती है, उसकी

तालिबान के राज में

दस दिन पहले एक फरमान जारी कर तालिबान ने लड़कियों और महिलाओं को कालेज और विश्वविद्यालयों में जाने से रोक दिया। उच्च शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान में साफ कहा गया कि सारे कालेज और विश्वविद्यालय सरकार के इस आदेश को तत्काल प्रभाव से लागू करें।

जिंदगी हारते लोग

तो उससे केवल उस व्यक्ति के मनोबल की कमजोरी जाहिर नहीं होती। वह एक समाज या समुदाय की बहुस्तरीय नाकामी का उदाहरण होता है। मुंबई का फिल्म और टीवी उद्योग पिछले कई सालों से इस समस्या से दो-चार है कि सिनेमा में हंसता-खेलता और सार्वजनिक जीवन में लोगों का

अमन की राह

प्रधानमंत्री से फोन पर बातचीत करके उन्होंने अपना ‘शांति फार्मूला’ लागू करने में भारत की मदद मांगी। भारत सरकार ने भी उन्हें इसके लिए आश्वस्त किया है। हालांकि इसके पहले भी कई मौकों पर भारत रूस और यूक्रेन के बीच छिड़े युद्ध को समाप्त करने के लिए मध्यस्

लापरवाही का सिलसिला

ऐसी घटना अगर सरकार की नजर में व्यवस्था में चूक का नतीजा है तो इसका सबक यह होना चाहिए कि भविष्य में ऐसी चूक रोकने के लिए पूरी तरह चाक-चौबंद इंतजाम किए जाएं। हैरानी की बात है कि परीक्षा के पहले परचा लीक होने की अनेक घटनाएं सामने आने के बावजूद सरकारें

सकारात्मक संकेत

उन्होंने कहा कि चीन विकास के लिए भारत के साथ काम करने को तैयार है। सीमावर्ती क्षेत्रों में पिछले दो सालों से बने तनावपूर्ण वातावरण को भी वह समाप्त कर स्थिरता लाने के पक्ष में है।

गौरतलब है कि भारत-चीन सीमा विवाद को सुलझाने के लिए गठित तंत

न्याय बनाम अन्याय

अदालतों में बैठे न्यायाधीश तथ्यों, तर्कों और सबूतों के आधार पर मामले में फैसला सुनाते हैं और उम्मीद की जाती है कि सही पक्ष को इंसाफ मिलेगा। लेकिन अगर खुद न्यायिक अधिकारी ही सबूत पेश करने के मामले में गड़बड़ी करने लगें और उसके आधार पर फैसला सुनाने लगे

भूखे को भोजन

अव्वल तो हर नागरिक के पास कोई न कोई ऐसा काम होना चाहिए, जिससे वह खुद अपना और अपने परिवार का भरण-पोषण कर सके। मगर यह आदर्श स्थिति शायद किसी भी देश में नहीं है। इसलिए जो लोग खुद अपने भोजन का प्रबंध कर पाने में अक्षम हैं, उन्हें भोजन उपलब्ध कराने की ज

संवाद से समाधान

कुछ दिनों पहले ही तवांग इलाके में दोनों देशों की सेनाओं के बीच संघर्ष हुआ, जिसमें चीनी सैनिकों को अपने कदम वापस खींचने पड़े। उसके बाद लद्दाख क्षेत्र के लंबित मुद्दों पर दोनों देशों के सेनाधिकारियों ने सत्रहवें दौर की वार्ता शुरू की। वार्ता चीन के इल

एहतियात की जरूरत

इसके लिए जरूरी है कि जिन उपायों के सहारे हमारा देश कोरोना विषाणु के खतरे की जद से बाहर आ सका है, उनके प्रति अब भी कुछ समय तक लापरवाही नहीं बरती जाए। चीन से अभी जैसी खबरें आ रही हैं, वे चिंता पैदा करने वाली हैं। वहां अचानक एक बार फिर संक्रमण बढ़ गया

नकली का मर्ज

छापेमारी आदि के जरिए ऐसा करने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई के अभियान भी चलाए जाते हैं। मगर हकीकत यह है कि नकली दवाओं के उत्पादन और बिक्री हर साल कुछ बढ़ी हुई ही दर्ज होती है। इसमें न केवल दवा विक्रेता शामिल होते हैं, बल्कि चिकित्सक भी उनका साथ देते ह

Subscribe US Now