हमारे आईने में क्यों नहीं दिखती ‘बदसूरती’

भारतवर्ष में कोई व्यक्ति यदि रात में भूखा सोता है तो माना जा सकता है कि देश का सौभाग्य सो गया, लेकिन जब भूख से तड़पकर

फाकामस्ती

हम दिल्ली की सत्ता में आएंगे तो यहां की जनता को मुफ्त बिजली और पानी देंगे। आम आदमी पार्टी ने सत्ता में आने के बाद अपना यह वादा पूरा किया। लेकिन, यह वादा अधूरा था। दिल्ली की जनता को पूरा सच नहीं पता था। उसे यह नहीं बताया गया था कि बिजली-पानी से

पत्रकारिता की साख बचाने का फ़ॉर्म्युला!

पिछले दिनों कुछ तथाकथित ‘राष्ट्रीय’ खबरिया चैनलों ने अपनी विश्वसनीयता को जिस तरह गिराया है, उससे तो यही लगता है कि यदि भविष्य में भी इन चैनलों द्वारा इसी तरह गलत समाचार प्रसारित किए जाते रहे तो वह दिन दूर नहीं जब श्रोता-दर्शकों के मन में यह बात बैठ

…तो मुख्यमंत्री रह जाते उद्धव ठाकरे

महाराष्ट्र में एकनाथ शिंदे की सरकार को बहुमत हासिल हो चुका है। महाराष्ट्र के नवनिर्वाचित विधानसभा अध्यक्ष राहुल नार्वेकर ना केवल एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाले विधायक दल को शिवसेना विधायक दल के रूप में स्वीकार कर चुके हैं बल्कि इस गुट के सचेतक भरत गोग

छुपकर आक्रमण करना अनैतिक सत्ता लोभ

देश के कई राज्यों में भारतीय जनता पार्टी की सरकार है, कई राज्यों में उसकी गठबंधन की सरकार है। देश के शीर्ष और संपन्न माने जाने वाले महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, छत्तीसगढ़, झारखंड और तमिलनाडु में भाजपा की सरकार नहीं है। यही बात

श‍िंंदे सेना = श‍िवसेना! क्‍या एकनाथ ने कर दी उद्धव ठाकरे की राजनीत‍िक हत्‍या?

महाराष्‍ट्र की राजनीत‍ि में आज जो हुआ, उसकी उम्‍मीद कुछ ही लोगों को रही होगी। एकनाथ श‍िंंदे को सीएम की कुर्सी द‍िए जाने के ऐलान में उद्धव ठाकरे के ल‍िए कई संदेश हैं। श‍िवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे अपनी सरकार नहीं बचा सके। पार्टी पर भी उनकी पकड़ नहीं र

आपातकाल की हिंसा बनाम अग्निपथ की हिंसा : इंदिरा के खिलाफ उतरे युवा हीरो, मोदी के खिलाफ उतरे युवा अराजक क्यों?

”भाइयों और बहनों राष्ट्रपति जी ने आपातकाल की घोषणा की है, इससे आतंकित होने का कोई कारण नहीं है” 26 जून साल 1975 की सुबह तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आपातकाल की घोषणा करते हुए इन्हीं शब्दों का इस्तेमाल किया था। रेडियो पर आए देश के नाम इस सं

मदांधता में खुदकुशी करने का ‘सौभाग्य

यदि आप देशहित में कुछ सोचते हैंं, अपने देश के लिए आपका कोई सपना है और आपकी सोच में भारत विश्व का सर्वश्रेष्ठ लोकतांत्रिक देश है, तो निश्चित रूप से भारत की वर्तमान स्थिति को देखकर आप विचलित हो गए होंगे। आप किसी राजनीतिक दल से जुड़े हैं या नहीं, यहां

जानिये क्या है अष्टांग योग, इसके कितने हिस्से हैं और क्या है सबका महत्व

21 जून को पूरा संसार विश्व योग दिवस मना रहा है और योगासन कर रहा है। समूचा विश्व इन आसनों को ही योग समझे जा रहा है, जो सत्य नहीं है। योग के आसन ही पूर्ण रूप से योग नही हैं। यह तो योग की अवधारणा का महज़ आठवां हिस्सा है। योग का अर्थ है जोड़ना और जुड़न

राजनीति में ‘स्वहित’ के आगे सब बौने

पिछले दिनों भारतीय प्रशासकीय सेवा के वरिष्ठ मित्र से पूछा कि ‘राजनीति में आते ही कोई शख्स इतनी अकूत संपदा का स्वामी कैसे हो जाता है?’ इस विषय पर बातचीत के दौरान उन्होंने बड़ा सटीक उत्तर दिया, और वह उत्तर था- ‘आज लोग राजनीति में आते ही इसीलिए हैं…।’

‘अग्निपथ’ जैसी योजना कई देशों में है लागू- BJP नेता ने ऐसे किया बचाव

प्रेम शुक्ल

गत आठ वर्षों में भाजपानीत केंद्र सरकार ने विकास के सभी आयामों पर अपनी कार्यशैली की अमिट छाप छोड़ी है। स्वास्थ्य, सुरक्षा, शिक्षा, सड़क से लेकर रोजगार जैसे क्षेत्रों में प्रामाणिक और अतुलनीय कार्य किया है। प्रधानमंत्री न

‘अग्निपथ’ योजना पर क्यों है भ्रम और क्या है सच्चाई?

प्रेम शुक्ल

गत आठ वर्षों में भाजपानीत केंद्र सरकार ने विकास के सभी आयामों पर अपनी कार्यशैली की अमिट छाप छोड़ी है। स्वास्थ्य, सुरक्षा, शिक्षा, सड़क से लेकर रोजगार जैसे क्षेत्रों में प्रामाणिक और अतुलनीय कार्य किया है। प्रधानमंत्री न

अनूठी थी छत्रपति शिवाजी की शासन व्यवस्था

प्रो. संजय द्विवेदी

शिवाजी का नाम आते ही शौर्य और साहस की प्रतिमूर्ति का एहसास होता है। अपने सपनों को सच करके उन्होंने खुद को न्यायपूर्ण प्रशासक रूप में स्थापित किया। इतिहासकार भी मानते हैं कि उनकी राज करने की शैली परंपरागत राजाओं और मुगल

‘धरती के स्वर्ग’ को फिर किसकी लग गई नजर

भारत का स्वर्ग कहलाने वाला कश्मीर फिर हिंसा की आग में धधक उठा है। ऐसा लगता है, यह अपने 1990 के दशक का इतिहास फिर से दुहराने जा रहा है। घाटी से पलायन फिर शुरू हो गया है और भारतीय गणराज्य के सबसे ताकतवर केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह स्वयं इस पलायन को र

ताजमहल और ज्ञानवापी विवाद के बीच अटाला मस्जिद क्यों चर्चा में?

इन दिनों आगरा का ताजमहल और वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद खूब चर्चा में हैं। एक पक्ष दावा कर रहा है कि मुगल काल में हिंदुओं के पूजनीय स्थलों को तोड़कर इनका निर्माण किया गया था। सोशल मीडिया में एक लिस्ट भी तैर रही है, जिनमें 10 मस्जिदों का जिक्र है और

भक्षक पुलिस : बाड़ ही खेत को खाने लगे…

निर्दयता की हद को पार कर रूह कंपा देने वाली एक दुर्भाग्यपूर्ण घटना आज से करीब 30 साल पूर्व 12 जुलाई, 1991 को उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में हुई थी। वहां सिखों का एक जत्था अपने परिवार के साथ बस से तीर्थयात्रा को निकला था। बस में सवार 11 लोगों को पुलिस

World Environment Day: कहां से लाएंगे दूसरी पृथ्वी?

वीर सिंह

वर्ष 1973 से प्रतिवर्ष 5 जून को संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम के तत्त्वाधान में मनाया जाने वाला विश्व पर्यावरण दिवस सबसे बड़ा पर्व बन गया है—संभवतः विश्व के विभिन्न देशों में मनाए जाने वाले सांस्कृतिक पर्वों से भी बड़ा। वर्ष 20

हर आलोचना ‘राजद्रोह’ नहीं

सुप्रीम कोर्ट ने अंग्रेजों द्वारा भारतीय आजादी के क्रांतिकारियों के विद्रोह को दबाने के लिए 152 वर्ष पहले बनाए गए राजद्रोह कानून की धारा 124ए पर पुनर्विचार की अनुमति देते हुए अगले आदेश तक के लिए रोक लगा दी है। मुख्य न्यायाधीश एनवी रमण, जस्टिस सूर्य

ब्रह्माण्ड की गुत्थियों को सुलझाता मन

डॉ. वीर सिंह

मानव मन कभी किसी चीज से इतना आश्चर्यचकित नहीं हुआ जितना ब्रह्माण्ड से। ब्रह्माण्ड के सभी पहलू सदैव से ही मानव के लिए एक पहेली रहे हैं। यहाँ तक कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी की लम्बी छलांगों से भी हमारे ब्रह्माण्ड की सम्पूर्ण जानक

मलेरिया से जंग में भारत के सामने क्या चुनौतियां हैं?

प्रो. एन.के. गांगुली

इस समय पूरी दुनिया कोविड-19 महामारी से उबरने के लिए विभिन्न रणनीतियों पर मंथन कर रही है और शायद यही सही समय है कि वेक्टर रोग जनित जानलेवा बीमारी मलेरिया पर भी बात की जाये और इसके उन्मूलन की सार्थक रणनीति बनाई

पाकिस्तान राजनीतिक आक्षेप और इसकी विदेश नीति के संभावित प्रक्षेपवक्र

डॉ. मनन द्विवेदी, शोणित नयन

भारत और पाकिस्तान के द्विपक्षीय संबंधों की बुनियाद
भारत और पाकिस्तान के द्विपक्षीय संबंधों की कोलाहल इस बुनियाद पर टिकी हुई है, कि देश में अराजक, अंधव्यवस्थात्मक और राजनीतिक रूप से अस्थिर स्थिति के कारण पाकिस

पुलिस और राजनीति… तेल और पानी का मेल

हर किसी का सम्मान नहीं किया जाता और हर कोई सम्मान का हकदार भी नहीं होता। दरअसल, सम्मान हृदय का भावोद्गार होता है जो उस खास के प्रति व्यक्त किया जाता है, जिसका संपर्क—सान्निध्य हमें उल्लासित करता है, प्रेरणा देता है, मार्गदर्शन करता है और हौसला बढ़ा

क्रांतिकारी मंगल पांडेय की पुण्यतिथि पर विशेष: वह क्रांतिकारी जिसे लक्ष्मी बाई, भगत सिंह ने माना आदर्श

उमा शंकर पांडेय

15 अगस्त का दिन हमारे देश में स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाया जाता है। मन में देश प्रेम की भावना जागृत होती है, हम इस दिन देश को आजाद कराने वाले शहीदों को सम्मान के साथ स्मरण करते हैं। इन देशभक्तों की वजह से हमारा देश स्वत

चीन, सेना और सऊदी अरब के त्रिकोण में फंस गए इमरान खान

प्रेम शुक्ल

पाकिस्तान इस समय राजनीतिक बदहाली के दौर से गुजर रहा है, उसकी इस राजनीतिक बदहाली के मूल में उसकी आर्थिक बदहाली है। दुनिया इस तथ्य से भली-भांति अवगत है कि पाकिस्तान का सत्ता केंद्र निर्वाचित सरकारों की बजाए पाकिस्तानी से

उत्कल दिवस विशेष: ओडिशा को क्यों कहते हैं भारत की आत्मा? जान लीजिये

मनोज दास

एक अप्रैल को उत्कल दिवस मनाया जाता है। ‘उत्कल’ पूर्वी भारत के ओडिशा राज्य का का प्राचीन नाम है। यह क्षेत्रफल के हिसाब से देश का 8वां सबसे बड़ा और जनसंख्या के हिसाब से 11वां सबसे बड़ा राज्य है। ओडिशा अपने प्राचीन हेरिटेज स

अहम और जिद के कारण तीसरे विश्वयुद्ध के मुहाने पर दुनिया

बच्चों जब ज़िद पर अड़ते हैं तो उन्हें बहला—फसलाकर, प्यार से मना लिया जाता है, लेकिन यदि राष्ट्राध्यक्ष अपने राष्ट्र सहित दूसरे राष्ट्र का नाश करने के लिए जिद पर उतारू हो जाए तो उसे कौन और कैसे समझाए? रूस-यूक्रेन के बीच जारी जंग में यही तो देखने के

हिजाब विवाद: कर्नाटक हाईकोर्ट के फैसले पर क्यों मचा है बवाल?

बीते दिनों में कर्नाटक हाई कोर्ट ने गणवेश में हिजाब के मामले पर एक फैसला सुनाया। मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति ऋतुराज अवस्थी की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय पीठ में न्यायमूर्ति कृष्णा दीक्षित और न्यायमूर्ति जेबुन्निसा मोहिउद्दीन शामिल थे। इस खंडपीठ ने

कांग्रेस नहीं, भाजपा के लिए खतरे की घंटी है ‘आप’

आखिर पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने अपना जलवा कायम रखा। अब कोई कितना भी विश्लेषण क्यों न करे, कितना ही आरोप-प्रत्यारोप क्यों न लगाए, जीत तो जीत ही है, चाहे वह एक मत से ही क्यों न हुई हो। दूसरी बात यह भी कि हारने वाले ने भी तो मेहनत की थी। स्वाभाविक है, वह अपनी हार से बिलबिलाएगा ही। ह

मेड़बंदी: तपती धरती पर पानी बचाने का जखनी मॉडल

दुनिया में पानी को लेकर कई तरह के शोध और खोजें हो रही हैं, पानी को बचाना और उसको पीने योग्य बनाना आज के समय में एक बड़ी चुनौती साबित हो रही है। दुनिया के कई ऐसे देश हैं, जहां पीने योग्य पानी को पाने के लिए लोगों को काफी मेहनत करनी पड़ रही है। करीब-करीब दुनिया के सभी देशों में पेयजल की समस्या गहरा

परमाणु हमले की आशंका के बीच ‘दोस्ती’ निभाने की चुनौती

जापान यात्रा के दौरान हिरोशिमा में जिनके यहां हम ठहरे थे उन्होंने अपने 6 अगस्त, 1945 दिन का दुखद और हृदय विदारक संस्मरण सुनाते हुए कहा था कि उस दिन वह शहर से बाहर थे। परमाणु विस्फोट के बाद जब वह वापस आए तो उनके परिवार का कोई सदस्य जिंदा नहीं बचा था। जो लोग जिंदा बच गए थे, उन्होंने विस्फोट की भयाव

Ukraine Russia War: अपने ही बुने जाल में उलझता रूस

सरहद से सटे देशों के बीच युद्ध कोई नई बात नहीं है। ऐसा काफी पहले से होता आ रहा है। पहले तीर-तलवारों से युद्ध लड़ा जाता था, अब अत्याधुनिक हथियारों, यहां तक कि अणुबम और परमाणु जैसे खतरनाक हथियारों से युद्ध लड़ा जाने लगा है। रूस के राष्ट्रपति पुतिन ने अपने परमाणु हथियार चालक को जिस प्रकार हाई अलर

ये आतंकी हमला भर नहीं, युद्ध है और इसमें EU यूक्रेन के साथ है

अनुरंजन झा, इंग्लैंड से

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे जंग को एक हफ्ते हो गए हैं। रूस को शायद पहले ये उम्मीद रही होगी कि यूक्रेन को वो 24 से 48 घंटे में निपटा लेगा, क्यूंकि उसे ये तो यकीन था ही कि नेटो देश अपनी सैन्य शक्तियों के साथ यूक्रेन की तरफ हाथ नहीं बढ़ाएंगे क्यूंकि वो कदम तीसरे

Russia- Ukraine War: यूक्रेन पर रूस का हमला और नाटो की भूमिका के मायने

अनुरंजन झा, इंग्लैंड से

यूक्रेन पर रूस के हमले के 8 घंटे के बाद नाटो ( नार्थ एटलांटिक ट्रीटी आर्गनाइजेशन) एक्टिव हुआ है। गुरुवार की सुबह जब रूस ने यूक्रेन पर हमला किया तो सबसे अहम सवाल यही था कि यूक्रेन पर रूस के हमले के बाद अब ब्रिटेन, दूसरे यूरोपीय देश या नाटो क्या करेगा ? रूस और यू

चुनावों में हराया, पर बीजेपी ने ही कांग्रेस को ज‍िंदा भी क‍िया, अपनी ग‍िरेबां में भी झांकने की ह‍िम्‍मत द‍िखाए सरकार

पूर्व प्रधानमंत्री स्व. चंद्रशेखर ने अपनी आत्मकथा में लिखा है कि युगोस्लाविया के एक प्रोफेसर ने, जो सारी दुनिया में ‘शरणार्थियों की समस्या’ पर शोध कर रहे थे, उनके एक प्रश्न का उत्तर देते हुए कहा था कि ‘हमारे देश में महात्मा गांधी को भी गरीबी के दर्द का अनुभव तब हुआ, जब दक्षिण अफ्रीका में उन्हे

वोटों की बीन पर नाचता लोकतंत्र!

वीर सिंह

पांच राज्यों के वर्तमान चुनाव काल में आप पश्चिम बंगाल का विगत चुनाव तो नहीं भूले न? चुनाव जीतने के बाद बहुमत वाली पार्टी के कार्यकर्ताओं ने किस तरह से विरोधी पार्टी को वोट देने वाले सामान्य लोगों के घर जलाए, हत्याएं की, और कितने ही लोगों को पड़ोसी राज्यों में शरण लेने के लिए

क्षणिक लोभ और पांच साल का मरोड़

तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री विंस्टन चर्चिल ने और अंग्रेजों ने भारत को ऐसा समाज कहा था जो लोकतंत्र को न पचा पाएगा, न इसे संभालकर आगे बढ़ा पाएगा और कुछ ही समय में खंड—खंड में बंटकर स्वतः नष्ट हो जाएगा। इसके पीछे की वजह यहां के राजनीतिज्ञों की अयोग्यता और अनुभवहीनता बताई गई और कहा गया कि सत्ता स

UP Election Blog: आसान नहीं है ‘आईने’ से सवाल पूछना

समझ में नहीं आता कि हम आज भी बेवजह की बातों पर बहस करके अपना समय जाया करते रहते हैं। उसमें भी आज के चुनावी दौर में। कभी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, कभी नेहरू, तो कभी जिन्ना को बीच में लाकर खुद को राष्ट्रभक्त साबित करने में जुट जाते हैं। संभव है इसके प्रमुख दो कारण हों। पहला यह कि देश में जो बेर

मंदिरों में दलितों के प्रवेश के लिए लड़े, ‘विशिष्टाद्वैत’ सिद्धांत दिया; जानिये- स्वामी रामानुजाचार्य के बारे में सबकुछ

शुभांगी उपाध्याय
भारतवर्ष पर सैकड़ों वर्षों से ही अनगिनत आक्रमण होते आए हैं परन्तु इसकी अखण्डता को अक्षुण्ण रखने हेतु अनेकों वीर, महात्मा, संत, कवि आदि ने इस भूमि पर जन्म लिया और हर प्रकार से इसकी रक्षा की। ऐसा ही एक दौर था आज से लगभग हजार वर्ष पूर्व, जब भारत की अस्मिता पर आँच आई थी। विदेश

Election 2022: …ये चुनावी वादे हैं, आगे जुमले बन जाएंगे!

संविधान निर्माताओं ने चुनाव का नियम लोकतंत्र की पवित्रता को बनाए रखने के लिए तैयार किया था। उनका मानना था कि यदि पांच साल में जनता अपने ‘शासक’ से ऊब जाए तो नए और स्वच्छ छवि वालों और शिक्षित लोगों को चुनकर देश की श्रेष्ठ पंचायत में भेज सकती है, जो उनकी समस्या सर्वोच्च पटल पर रखकर उससे निजात दि

क्या सच में सिद्धू का कृत्य ‘राष्ट्रवाद’ से अलग है?

सब जानते हैं कि नवजोत सिंह सिद्धू भारत के लिए और इमरान खान पाकिस्तान के लिए क्रिकेट खेलते थे, लेकिन यह जानकारी शायद किसी को नहीं होगी कि इनकी दोस्ती ऐसी भी है कि लोगों की अंगुली सिद्धू को ‘गैर राष्ट्रवादी’ ठहराने में उठने लग जाए। पाकिस्तान का जन्म ही भारत के विरोध के लिए हुआ था, जिसे हम आज तक

मजबूत और जीवंत है भारतीय गणतंत्र

एक गणतंत्र को देशवासियों द्वारा सुदृढ़ और जीवंत बनाया जाता है। अपने वर्तमान स्वरूप में,भारतीय गणतंत्र ने गतिशील संतुलन बनाए रखते हुए 73 वर्ष पूरे कर लिए हैं। भारत की बहुलता और विविधता को दर्शाने वाली ताकतों कीखींच-तान से यह अक्सर दबावका अनुभव करता है। इसका श्रेय देशवासियों को दिया जाना चाहिए क

UP Election:अनूठे दल बदल वाला चुनावः पिक्चर अभी बाकी है…

डॉ.संजीव मिश्र

उत्तर प्रदेश सहित पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव का बिगुल बज चुका है। दल-बदल से लेकर आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो चुका है। चुनाव आयोग की सख्ती से बड़ी जनसभाओं और गली-गली लाउडस्पीकर का शोर तो नहीं सुनाई दे रहा है, किन्तु सोशल मीडिया के मैदान में नए-नए अस्त्र-शस्त्र

भ्रामक तथ्य नहीं कर सकते ‘बापू’ का कद छोटा

पिछले कुछ वर्षों से ऐसा लगता है जैसे देश में हिंदू-मुसलमानों के बीच के रिश्तों में नेताओं ने राजनीतिक आंधी चला दी हो। रोज सुबह से ही कोई भी पक्ष एक—दूसरे को नीचा दिखाने में पीछे हटता नजर नहीं आता है। यहां तक कि दोनों कौम के बीच ऐसा जहर भर दिया गया है कि आम आदमी की कौन कहे, खुद राष्ट्रपिता महा

कोरोना से लेकर बेरोजगारी तक: नए साल में भारत के सामने हैं ये चुनौतियां

डॉ. संजीव मिश्र

वर्ष 2021 बीत चुका है। वह वर्ष जिसने हममें से अधिकांश के आसपास तनाव, दुख व कष्ट का वातावरण सृजित कर दिया था। कोरोना से देश में हुई मौतें और कई बार इलाज भी न करा पाने का दर्द आज भी लोगों को पीड़ा की अनुभूति करा रहा है। ऐसे में वर्ष 2022 हर नए वर्ष की तरह उम्मीदों की प

पूर्ण टीकाकरण अभियान से ही कोरोना के तीसरी लहर को रोकना है संभव

कोरोना के नए वैरिएंट ओमीक्रॉन को लेकर दुनिया ही नहीं, भारत में भी चिंता बढ़ गई है। सरकारी स्तर पर इससे निबटने के लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। देश में हम राज्य सरकारों के कोरोना टीकाकरण अभियान की बात करें, तो निःसंदेह मध्य प्रदेश सरकार ने बेहतर प्रतिमान स्थापित किया है। लगभग पूरी वयस्क आब

पाकिस्तान के मूल में ही द्वेष

भारत विभाजन के लगभग तय हो जाने पर न्यूयॉर्क टाइम्स के संवाददाता हरबर्ट एल मैथ्यूज जिन्ना से मिले। बातचीत के क्रम में उन्होंने जिन्ना का ध्यान उन बातों की ओर आकृष्ट किया जिन पर तमाम लोगों का भविष्य निर्भर करता था। उन सबका जिन्हें उन प्रदेशों में रहना था जो पूरे भारत से अलग किए जाते। मैथ्यूज ने

ओमिक्रोन : खतरा है बड़ा, रहें सतर्क और सावधान

भारत समेत 60 से अधिक देशों तक फैल चुके कोरोना के नए वैरिएंट ओमक्रोन के चलते ब्रिटेन में विश्व की पहली मौत हुई है । ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने इसकी पुष्टि की है । नए वेरिएंट की बढ़ती रफ्तार को थामने के लिए आज विश्व में जहां नाना तरह के उपाय खोजे जा रहे हैं, वहीं कुछ शोधकर्ताओं का म

हार में भी जीत तलाशती सरकार

भारतीय कृषि क्षेत्र में ‘व्यापक सुधार’ लाने एवं किसानों की आमदनी दोगुना करने की नीयत से केंद्र की नरेन्द्र मोदी सरकार द्वारा लाए गए तीन नए कृषि कानून धरातल पर आने से पहले ही दफन हो गए। किसानों, जिन्हें सरकार ने आंदोलनजीवी, फर्जी प्रदर्शनकारी, खालिस्तानी आतंकी तक कहने से नहीं चूकी, के एक साल स

यह राजनीति है… जरा तोल—मोल के बोल

निशिकांत ठाकुर

वंशवाद या परिवारवाद शासन की वह पद्धति है जिसमें एक ही परिवार, वंश या समूह से एक के बाद एक कई शासक बनते जाते हैं। माना जाता है कि लोकतंत्र में वंशवाद के लिए कोई स्थान नहीं है, इसके बावजूद कई देशों में आज भी वंशवाद हावी है। दरअसल, वंशवाद, निकृष्टतम कोटि का आरक्षण है। हा

कृषि कानून पर “बैकफुट” या प्रधानमंत्री का ” मास्टर स्ट्रोक”

निशिकांत ठाकुर

ऐसा क्या हो गया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को अचानक तीनों कृषि सुधार कानून वापस लेने का निर्णय करना पड़ा? निश्चित रूप से उन्होंने माहौल को भांपने के लिए किसी एजेंसी का सहारा लिया होगा और उसके नेगेटिव फीडबैक ने उन्हें उनके इस कदम पर चौंकाया होगा कि उन्हें इन तीनो कृ

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